रायगढ़। सरकारी कर्मचारियों के लिए आवास बनाने 1993 में तत्कालीन कलेक्टर ने 25 एकड़ जमीन आवंटित की थी। जमीन आवंटन के बाद बिना प्रीमियम और भूभाटक चुकाए जमीन पर प्लॉट काटकर बांट लिए गए। अब तक यह मामला नहीं सुलझ सका है। अब नजूल विभाग ने निवास कर रहे लोगों को नोटिस देना शुरू किया है। जो दस्तावेज जमा हो रहे हैं, उसके हिसाब से सबका प्रीमियम आदि का निर्धारण होगा। केलो विहार आवासीय कॉलोनी में करीब 400 लोगों को प्लॉट बांटे गए थे। इसमें से अधिकतर ने मकान बना लिए हैं। करीब 25 प्रश लोगों ने अपने प्लॉट दूसरों को एफिडेविट करके बेच दिए हैं।
अभी तक जमीन का प्रीमियम और भूभाटक निर्धारण नहीं होने के कारण किसी को भी पट्टा नहीं मिल सका था। मिली जानकारी के मुताबिक करीब 150 आवंटियों को नोटिस दिया गया है। उनसे आवंटन संबंधी दस्तावेज और अन्य कागजात मांगे गए हैं। जो भी दस्तावेज प्रस्तुत कर रहे हैं, उनकी गणना की जाएगी। बाकी लोगों को भी नोटिस भेजा जा रहा है। हालांकि इस बात पर संदेह है कि जो प्रीमियम तय होगा, उसे चुकाने के लिए लोग सहमत होंगे या नहीं। केलो विहार कॉलोनी में हाल ही में चुनाव भी संपन्न हुए हैं, जिसमें पट्टा वितरण भी एक मुद्दा था।
आवासीय की जगह कमर्शियल निर्माण
केलो विहार कॉलोनी में कई लोगों ने अपने मकानों के सामने दुकानें बना ली हैं। मौका जांच प्रतिवेदन में इसका जिक्र हो रहा है। प्लॉट का आवंटन सिर्फ आवास बनाने के लिए हुआ था। नजूल विभाग ऐसे निर्माणों का प्रतिवेदन अलग से बनाएगा। एप्रुव्ड नक्शे से अलग निर्माण कर लिया गया है। रोड से पर्याप्त दूरी भी नहीं छोड़ी गई है। कई लोगों ने सडक़ की जमीन पर कब्जा कर लिया है।

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