August 17, 2026

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किसडी पंचायत भवन में झंडा फहराने के दौरान सरपंच से जातिगत भेदभाव

सचिव ने किया “शुद्धिकरण”, पंचायत में फैला आक्रोश..

सरायपाली- महासमुंद // अविनाश साहू :

ग्राम पंचायत किसडी में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम एक विवाद का कारण बन गया है। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान पंचायत सचिव पृथ्वीराज भोई ने सरपंच के साथ सरेआम जातिगत भेदभाव करते हुए “शुद्धिकरण” किया। इस कृत्य से पूरे गांव में आक्रोश का माहौल है।

प्राप्त जानकारी अनुसार पंचायत भवन में झंडा फहराने के दौरान मौजूद सचिव पृथ्वीराज भोई ने सरपंच के पास जाकर उनके ऊपर तुलसी मिला पानी छिड़का, पंडित बुलाकर मंत्रोच्चारण कराया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह कृत्य सरपंच की जाति चमार होने के कारण “अपवित्रता” दूर करने की मंशा से किया गया। सार्वजनिक स्थल और सरकारी कार्यालय में मंत्रोच्चारण कर इस तरह का व्यवहार न केवल अपमानजनक है बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ दर्शाता है।

गांव के लोगों और पंचायत सदस्यों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि 21वीं सदी में भी इस तरह की मानसिकता शर्मनाक है।
एक ग्रामीण मुरलीधर ने बताया कि “सरपंच पूरे गांव के प्रतिनिधि हैं। उन्हें इस तरह अपमानित करना पूरे गांव का अपमान है।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी हो चुका है विवाद-
स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह पहला मौका नहीं है जब सचिव और सरपंच के बीच टकराव हुआ हो। इससे पूर्व भी सचिव पृथ्वीराज भोई द्वारा सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि उस प्रस्ताव में सचिव को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था और सरपंच भारी मतों से अपने पद पर बने रहे। ग्रामीणों का मानना है कि उसी हार की खुन्नस के कारण सचिव इस तरह की हरकत कर रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों की राय–
कानून जानकारों का कहना है कि सरकारी कार्यालय में किसी जनप्रतिनिधि के साथ जाति के आधार पर भेदभाव करना और “शुद्धिकरण” जैसा कृत्य करना SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत अपराध है। इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग-
घटना के बाद सरपंच ने जिला कलेक्टर महासमुंद, CEO पंचायत, SDM और पुलिस निरीक्षक SARAIPALI से लिखित शिकायत कर दोषी सचिव के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायत का माहौल और खराब हो सकता है।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से जांच के आदेश दिए जाने की बात कही जा रही है। देखना होगा कि पंचायत राज व्यवस्था में बैठे अधिकारी इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाते हैं।

Ceo जनपद- राजेश साहू
मामला संज्ञान में आया है, जातिगत दुर्भावना रखना गलत है, सरपंच ने आवेदन दिया है. उक्त सचिव को हटाने प्रस्ताव भेजा जाएगा.

शासकीय आदेश की अवहेलना- सामाजिक कार्यकर्ता- बलराज नायडू :

प्रदेश के साथ-साथ जिले में भी 3 सालो से अधिक समय से एक ही जगह पर जमें रह रहे अधिकारियों कर्मचारियों से भी तानाशाही चरम पर हो रही है! जिसके चलते बार बार प्रशासनिक अधिकारी वा नेताओं आम जनता के बीच टकराव की बनी है!