August 27, 2026

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जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी धूमधाम से मनाया गया, 11 दिन तक निकला जुलूस-ए-मुहम्मदी..

नन्हे नौनिहालों का जोश बना आकर्षण का केंद्र, अमन-चैन की दुआ के साथ समापन..

सरायपाली// अविनाश साहू :

इस्लामी कैलेंडर के दूसरे महीने रबी-उल-अव्वल की 12 तारीख को इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मुहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के यौम-ए-पैदाइश के मौके पर शहर में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी बड़े ही अदब, एहतराम और धूमधाम से मनाया गया।

इस मुबारक मौके पर लगातार 11 दिनों तक शाम को बच्चों की विशेष रैली और जुलूस-ए-मुहम्मदी का आयोजन किया गया। नन्हे नौनिहालों ने रोजाना जुलूस में शिरकत कर जिस जोश, अदब और मोहब्बत का मुजाहिरा किया वह काबिले-तारीफ रहा। हर दिन बढ़ती हुई बच्चों की तादाद ने जुलूस की रौनक को और बढ़ा दिया।

शहर में निकला विशाल जुलूस–

मुख्य जुलूस दोपहर 03 बजे जामा मस्जिद से शुरू हुआ जो इस्लाम मोहल्ला, बाजारपारा, पदमपुर रोड, ओडिया पारा, गौरव पथ होते हुए शाम 06 बजे ईदगाह पहुंचा। वहां झंडा फहराने के बाद जुलूस वापस जयस्तंभ चौक स्थित मदरसा निजामिया पहुंचा, जहां झंडा फहराकर देश-प्रदेश की तरक्की, खुशहाली, अमन-चैन की दुआ मांगी गई।

पैगंबर की सीरत पर रोशनी–

इस मौके पर पेश इमाम अब्दुस सत्तार अशरफी ने तकरीर में कहा कि “हजरत पैगंबर मुहम्मद मुस्तफा साहब ने दुनिया को जूता पहनने से लेकर कपड़े पहनने तक के आदाब, माता-पिता से लेकर दोस्तों और पड़ोसियों तक के हुकूक और जिंदगी के हर छोटे-बड़े मामले के उसूल बताए। आप सिर्फ इबादत का रास्ता नहीं, बल्कि अखलाक, मोहब्बत, रहम, इंसाफ और भाईचारे का पूरा तरीका सिखाकर रहमतुल्लिल-आलमीन बनकर आए। उनकी सीरत सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि अपनी असल जिंदगी में उतारने के लिए है।”

प्रशासन और सर्व समाज का मिला सहयोग–

कार्यक्रम में नायब मुतवल्ली अशफाक खान ने जुलूस के सफल आयोजन के लिए शासन-प्रशासन, पुलिस और नगरपालिका प्रशासन का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन सभी भाइयों, बुजुर्गों और मोहल्ले के लोगों का भी शुक्रिया अदा किया जिन्होंने रास्ते में बच्चों का इस्तकबाल किया, हौसला बढ़ाया और पानी/शरबत का इंतजाम किया।

शहर में कई समाज के प्रतिनिधियों ने जगह-जगह जुलूस का स्वागत-सत्कार कर भाईचारे की मिसाल पेश की।

इंसानियत की मिसाल–

जुलूस के दौरान गौरव पथ पर दो बार भीड़ के बीच से एंबुलेंस को रास्ता बनाकर जाने दिया गया, जिससे मरीज को राहत मिली। इस पहल का सभी ने स्वागत किया और यह जुलूस के अनुशासन और इंसानियत का बड़ा पैगाम बन गया।