August 27, 2026

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नेपाल में कुदरत का कहर: भीषण बाढ़ में 162 मौतें, 844 लापता; 133 भारतीयों की तलाश तेज

नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा से सटे रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ के बाद मौतों का आंकड़ा बढ़कर कम से कम 162 पहुंच गया है, जबकि करीब 844 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की बताई जा रही है। हादसे के बाद भारत और नेपाल के बीच राहत एवं बचाव प्रयास तेज किए गए हैं।

पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात

आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत कर दुख जताया और हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया।

भारत की ओर से राहत सामग्री पहुंचाने के साथ बचाव कार्य में सहयोग की तैयारी की जा रही है। एनडीआरएफ की टीमों को भी तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है।

भारत के विभिन्न राज्यों ने भी अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाने के लिए हेल्पलाइन और सहायता तंत्र सक्रिय किया है।

  • उत्तर प्रदेश ने 1070 हेल्पलाइन सक्रिय की है।
  • भारतीय दूतावास की ओर से सहायता के लिए संपर्क व्यवस्था जारी की गई है।
  • महाराष्ट्र में प्रभावित पर्यटकों की जानकारी जुटाने के लिए डेटा लिंक शुरू किया गया है।
  • लापता भारतीयों की पहचान और लोकेशन का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, तिब्बत क्षेत्र में स्थानीय समय के मुताबिक सुबह करीब 8:37 बजे भूकंप आया था। इसके लगभग तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली।

इस घटनाक्रम ने आशंका पैदा की है कि भूकंप के झटकों से हिमनद या किसी जलस्रोत में अचानक बदलाव हुआ होगा, जिसके कारण फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बनी। हालांकि, बाढ़ के वास्तविक कारण की पुष्टि विस्तृत वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुल, सड़क और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान

बाढ़ का असर केवल आबादी वाले इलाकों तक सीमित नहीं रहा। सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

  • करीब 19 मोटरेबल पुल बाढ़ में बह गए।
  • लगभग 42 किलोमीटर लंबी सड़क के कई हिस्से क्षतिग्रस्त या बह गए।
  • रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना सहित कई पावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए।
  • कई वाहन और इमारतें तेज बहाव की चपेट में आए।
  • नदी किनारे बसे कई गांवों और बस्तियों में भारी नुकसान हुआ।

रसुवागढ़ी से जुड़े इलाकों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है। राहत टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम इलाकों तक पहुंचना और लापता लोगों का पता लगाना है।

सोशल मीडिया पर सामने आई तबाही की तस्वीरें

बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पानी की भयावह रफ्तार दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर तेज बहाव ने पुलों, वाहनों और इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया।

कुछ वीडियो में विशाल लहर जैसी बाढ़ को इमारतों और सड़क मार्गों से गुजरते हुए देखा गया। कई जगहों पर पुल कुछ ही सेकंड में पानी के तेज बहाव के सामने टिक नहीं सके।

हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित हर वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। आपदा के दौरान पुराने या गलत संदर्भ वाले वीडियो भी तेजी से वायरल हो सकते हैं।

किन इलाकों पर पड़ा असर?

बाढ़ से रसुवा और आसपास के कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार कई बस्तियों में पानी और मलबे का असर पहुंचा है।

प्रभावित बताए जा रहे क्षेत्रों में:

  • स्याफ्रूबेसी
  • बेत्रावती
  • मेलुंग
  • सल्लेटार
  • शांतिबाजार
  • पैरेबेसी
  • खल्ती बस्ती
  • सोले
  • त्रिशूली
  • बट्टार

शामिल हैं।

उत्तराखंड की केदारनाथ आपदा की आई याद

नेपाल की मौजूदा त्रासदी ने भारत में वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा की भयावह यादें ताजा कर दी हैं। अचानक आई बाढ़ और भारी मलबे ने नेपाल के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है।

नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। नदियों के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

पिछले साल भी आई थी विनाशकारी बाढ़

भोटेकोशी नदी क्षेत्र पिछले वर्ष भी दो बार विनाशकारी बाढ़ का सामना कर चुका है। उस दौरान रसुवा में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था और कम से कम 10 लोगों की मौत की खबर सामने आई थी।

इस बार की आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और बदलते मौसम के खतरे को सामने ला दिया है।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता 844 लोगों की तलाश और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना है। इनमें शामिल 133 भारतीयों को लेकर उनके परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है। आने वाले घंटों में राहत और बचाव अभियान से मिलने वाली जानकारी इस त्रासदी की वास्तविक तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।