सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में बारिश के मौसम के बीच मलेरिया का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है। उदयपुर विकासखंड के जंगल और पहाड़ी इलाकों से लगे गांवों में अब तक 39 लोगों में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई है। प्रभावित मरीजों में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और पंडो समाज के लोगों की संख्या भी बताई जा रही है।
मलेरिया के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और जांच बढ़ा दी है। दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य टीम लगातार पहुंचकर ग्रामीणों की जांच कर रही है और संक्रमित मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
इन गांवों में मिले मलेरिया के मरीज
उदयपुर विकासखंड के कई जंगल और पहाड़ी इलाकों में मलेरिया के मरीज सामने आए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- मतरिंगा
- खर्रानगर
- मुसर डांड
- मुकना पहाड़
- बारो पहाड़
- बकोई
- सेमी घोघरा
शामिल हैं।
इन गांवों की भौगोलिक स्थिति स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती है। अधिकांश क्षेत्र घने जंगल, नदी-नालों और पहाड़ियों से घिरे हुए हैं। बारिश के दौरान रास्तों की स्थिति और खराब हो जाने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मुश्किल हो जाती है।
पहले 31, अब बढ़कर 39 हुई मरीजों की संख्या
जानकारी के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर के चिकित्सकों ने 26 जुलाई 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को रिपोर्ट भेजी थी। उस रिपोर्ट में 31 लोगों के मलेरिया संक्रमित होने की पुष्टि की गई थी।
इसके बाद प्रभावित गांवों में जांच का दायरा बढ़ाया गया। जांच के दौरान 8 नए मरीज सामने आए। इस तरह उदयपुर विकासखंड के संबंधित क्षेत्रों में मलेरिया संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है।
मरीजों की संख्या में वृद्धि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में निगरानी और जांच को और तेज कर दिया है।
डेढ़ साल के बच्चे से 60 साल की महिला तक संक्रमित
मलेरिया संक्रमण ने अलग-अलग उम्र के लोगों को प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक संक्रमित मरीजों में करीब डेढ़ वर्ष का बच्चा भी शामिल है, जबकि एक 60 वर्षीय महिला में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है।
इससे साफ है कि प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
मरीजों की पहचान होने के बाद उनका निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार शुरू कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव पहुंच रही
मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांवों का लगातार दौरा कर रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीएस मार्को, एसडीएम रामराज सिंह और मलेरिया पर्यवेक्षक श्रवण श्रीवास सहित विभागीय अमला स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
टीम गांवों में पहुंचकर—
- संदिग्ध मरीजों की जांच
- संक्रमित मरीजों के उपचार
- नए मामलों की पहचान
- मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी
- आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता
का जायजा ले रही है।
बारिश में बढ़ता है मच्छरों का खतरा
बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए मलेरिया जैसी बीमारी से बचाव के लिए समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी हो जाता है।
खासकर दुर्गम गांवों में जहां स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में लंबा समय लगता है, वहां स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल और मैदानी टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
उत्तर छत्तीसगढ़ में मौसमी बीमारियों का खतरा
सरगुजा के उदयपुर क्षेत्र के अलावा उत्तर छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी बारिश के दौरान मौसमी बीमारियों के मामले सामने आते रहे हैं। बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर, वाड्रफनगर और कुसमी क्षेत्रों के कई गांवों में बारिश के दिनों में मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
इसी तरह सूरजपुर जिले के ओड़गी और भैयाथान विकासखंड के कई गांव भी मानसून के दौरान प्रभावित होते हैं।
ऐसे में उदयपुर के पहाड़ी इलाकों में मलेरिया के 39 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती बढ़ गई है। हालांकि, प्रभावित गांवों में जांच और उपचार का काम लगातार जारी है। विभाग की निगरानी इस बात पर भी रहेगी कि आने वाले दिनों में नए मरीजों की संख्या बढ़ती है या स्थिति नियंत्रण में आती है।

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