August 9, 2026

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30 साल पुराने 1.86 करोड़ गृह निर्माण ऋण घोटाले में बड़ा एक्शन, EOW ने 15 हजार पन्नों का चालान पेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में करीब तीन दशक पुराने गृह निर्माण ऋण घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। EOW रायपुर ने 1 करोड़ 86 लाख रुपये के कथित ऋण गबन मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में 15,000 पन्नों का चालान पेश किया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी आवासीय योजना के तहत जरूरतमंद लोगों के लिए स्वीकृत गृह निर्माण ऋण में फर्जी दस्तावेजों और गलत प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल कर राशि का दुरुपयोग किया गया। अब यह राशि ब्याज समेत बढ़कर करीब 104 करोड़ रुपये के डूबत ऋण में बदल चुकी है।

1995 से 1998 के बीच हुआ था कथित घोटाला

मामला वर्ष 1995 से 1998 के बीच का है। जांच के मुताबिक, आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित, रायपुर के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित, भोपाल के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों के साथ मिलकर कथित रूप से षड्यंत्र रचा।

आरोप है कि समिति के 186 सदस्यों के नाम पर प्रति सदस्य 1 लाख रुपये की दर से कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण स्वीकृत कराया गया।

फर्जी दस्तावेजों से निकाली गई ऋण राशि

EOW की जांच में सामने आया कि ऋण स्वीकृति के लिए कई दस्तावेजों का उपयोग किया गया, जिनमें—

  • फर्जी उपयोगिता प्रमाण-पत्र
  • भवन निर्माण पूर्णता प्रमाण-पत्र
  • अन्य दस्तावेज

शामिल थे।

इन दस्तावेजों के आधार पर ऋण राशि जारी कराई गई, जबकि वास्तविक स्थिति अलग थी।

भौतिक सत्यापन में सामने आई सच्चाई

जांच के दौरान जब संबंधित स्थानों का भौतिक सत्यापन कराया गया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

ऋण दस्तावेजों में रायपुरा और पंडरी कांपा क्षेत्रों में मकान निर्माण का दावा किया गया था, लेकिन मौके पर जांच में—

  • कोई मकान निर्मित नहीं मिला।
  • कई ऋणधारक बताए गए पते पर मौजूद नहीं मिले।

जिन लोगों के नाम पर ऋण जारी किया गया था, उनमें से कई सदस्यों की जानकारी भी संदिग्ध पाई गई।

मिलीभगत से करोड़ों के गबन का आरोप

EOW की जांच में आरोप लगाया गया कि इस पूरे मामले में कई अधिकारियों और पदाधिकारियों की भूमिका रही।

जांच के अनुसार, कथित षड्यंत्र में शामिल रहे—

  • आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी।
  • सहकारी आवास संघ रायपुर के तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू।
  • सहकारी आवास संघ भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा।

आरोप है कि बसंत कुमार साहू ने बिना पर्याप्त जांच के उपयोगिता और पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी किए, जिसके आधार पर ऋण प्रक्रिया आगे बढ़ी।

1.86 करोड़ का ऋण अब 104 करोड़ का बोझ

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित धोखाधड़ी से राज्य सहकारी आवास संघ को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

रिकॉर्ड के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक मूल राशि और ब्याज मिलाकर यह राशि करीब 104 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिसे डूबत ऋण के रूप में दर्ज किया गया है।

EOW ने कहा- पुराने मामलों पर भी कार्रवाई जारी

EOW अधिकारियों का कहना है कि पुराने लंबित आर्थिक अपराध मामलों को भी प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद ही न्यायालय में 15 हजार पन्नों का चालान प्रस्तुत किया गया है।

जांच एजेंसी का उद्देश्य है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय हो।