भिलाई नगर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया गया। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने क्षेत्र की उचित मूल्य दुकानों में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने खाद्य मंत्री से पूछा कि क्या हितग्राहियों को राशन कार्ड के तहत मिलने वाले चावल की जगह नगद राशि दी जा रही है और क्या गरीबों के हिस्से का चावल अवैध रूप से बाजार में बेचा जा रहा है।
विधायक के सवाल के बाद सदन में राशन वितरण की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई।
विधायक ने पूछे कई गंभीर सवाल
विधानसभा में विधायक रिकेश सेन ने सरकार से जानकारी मांगी कि—
- वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र की उचित मूल्य दुकानों में राशन वितरण में कोई गड़बड़ी सामने आई है या नहीं।
- क्या हितग्राहियों को चावल के बदले नगद भुगतान किया जा रहा है।
- गरीबों के हिस्से का चावल बाजार में बेचने की शिकायतें कितनी मिली हैं।
- दोषी राशन दुकानदारों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई है।
- भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि गरीब हितग्राहियों को मिलने वाला राशन पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध होना चाहिए और किसी भी तरह की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
खाद्य मंत्री ने सदन में दिया जवाब
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयालदास बघेल ने विधानसभा में जवाब देते हुए कहा कि वैशाली नगर क्षेत्र में हितग्राहियों को चावल के स्थान पर नगद राशि दिए जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
मंत्री ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चावल के अवैध परिवहन से संबंधित चार शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि कार्रवाई का विस्तृत विवरण विधानसभा में प्रस्तुत परिशिष्ट में उपलब्ध कराया गया है।
ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक से बढ़ी पारदर्शिता
खाद्य मंत्री ने बताया कि राशन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई तकनीकी उपाय लागू किए गए हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन
- बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण
- डिजिटल निगरानी व्यवस्था
इन व्यवस्थाओं से फर्जीवाड़े और राशन वितरण में होने वाली अनियमितताओं पर नियंत्रण रखने में मदद मिल रही है।
गरीबों के राशन की सुरक्षा पर जोर
विधायक रिकेश सेन ने विधानसभा में यह भी सवाल उठाया कि गरीब परिवारों के हक का राशन किसी भी स्थिति में गलत तरीके से बाजार तक नहीं पहुंचना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि राशन दुकानों की नियमित जांच, निगरानी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिर चर्चा में आई PDS व्यवस्था
विधानसभा में इस मुद्दे के उठने के बाद प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सरकार का कहना है कि तकनीकी व्यवस्थाओं और जांच प्रक्रिया के माध्यम से राशन वितरण को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
वहीं, जनप्रतिनिधियों का कहना है कि गरीब हितग्राहियों को मिलने वाले खाद्यान्न की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

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