बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में मानव-हाथी संघर्ष की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक जंगली हाथी ने एक ग्रामीण को कुचलकर मार डाला। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में डर बना हुआ है कि हाथियों का दल दोबारा किसी बड़ी घटना को अंजाम न दे दे।
यह घटना राजपुर वन परिक्षेत्र की बताई जा रही है, जहां शुक्रवार रात हाथियों का दल पहुंच गया था।
चार हाथियों का दल कर रहा था विचरण
जानकारी के अनुसार, रेवतपुर के नवापारा क्षेत्र में पिछले कुछ समय से चार हाथियों का दल विचरण कर रहा है। शुक्रवार रात बारिश के बीच हाथियों का यह दल राजपुर वन क्षेत्र में पहुंच गया।
ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों ने इलाके में पहुंचने के बाद घरों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। अचानक हाथियों की मौजूदगी से गांव में अफरा-तफरी मच गई।
जान बचाकर भाग रहे ग्रामीण को हाथी ने कुचला
मृतक ग्रामीण की पहचान बालम साय के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हाथियों के आने के बाद ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे।
इसी दौरान बालम साय हाथी की चपेट में आ गए। हाथी ने उन्हें कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और वन विभाग को सूचना दी।
वन विभाग ने संभाला मोर्चा
घटना के बाद वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई।
वन विभाग की टीम अब हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है, ताकि आगे किसी तरह की जनहानि को रोका जा सके।
गांव में फैली दहशत
हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत के बाद क्षेत्र में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार मौजूदगी से उन्हें हर समय खतरा बना रहता है।
मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
हाथियों से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
वन विभाग के अनुसार, हाथियों के आसपास होने पर ग्रामीणों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए—
- हाथियों के करीब जाने की कोशिश न करें।
- हाथियों को देखकर उन्हें भगाने या परेशान करने से बचें।
- अकेले जंगल या हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचें।
- हाथियों की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
- रात के समय विशेष सतर्कता बरतें।
बलरामपुर की यह घटना एक बार फिर छत्तीसगढ़ में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर चुनौती को सामने लाती है। वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय के साथ ही ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है।

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