लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को पुलिस विभाग में चयनित कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए पुलिस सुधारों और कानून-व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था का समर्थन करते हुए पुराने प्रशासनिक ढांचे पर कटाक्ष किया और हंसते हुए एक दिलचस्प टिप्पणी कर दी, जो अब चर्चा का विषय बन गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब पुलिस अधिकारियों के कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और फाइलें प्रशासनिक प्रक्रिया में अटक जाती थीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “यदि कोई फाइल बंद हो जाती थी तो उसे ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता था, यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी।”
कमिश्नरेट सिस्टम पर बोले CM योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था कोई नई अवधारणा नहीं है। देश के कई बड़े शहरों में यह व्यवस्था दशकों से लागू है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे लागू करने का साहस पहले किसी सरकार ने नहीं दिखाया।
उन्होंने कहा कि:
- कमिश्नरेट व्यवस्था पुलिस सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हुई है।
- कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में जवाबदेही बढ़ी है।
- आधुनिक पुलिसिंग को मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जिन लोगों को पुलिस सुधारों की जानकारी नहीं है, वे अक्सर इस व्यवस्था की आलोचना करते हैं।
2017 से पहले और अब के यूपी की तुलना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चुनौतियां थीं।
उन्होंने कहा:
- आए दिन दंगे और तनाव की घटनाएं होती थीं।
- कई इलाकों में लंबे समय तक कर्फ्यू लगाना पड़ता था।
- त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा बड़ी चुनौती होती थी।
- पुलिस अधिकारियों तक पर हमले होते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हों, तो आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कठिन हो जाता है।
पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि सरकार ने पुलिस बल के लिए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
उन्होंने कहा:
- कई जिलों में आधुनिक पुलिस बैरकों का निर्माण हुआ है।
- प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
- पुलिसकर्मियों के रहने और काम करने की स्थिति में सुधार हुआ है।
- आधुनिक तकनीक और संसाधनों को बढ़ावा दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कई जिलों में सबसे आधुनिक सरकारी इमारतें पुलिस विभाग की हैं।
भर्ती और प्रशिक्षण में आई तेजी
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले पुलिस विभाग की रिक्तियों का आकलन किया गया।
मुख्य उपलब्धियां:
- लाखों रिक्त पदों की पहचान की गई।
- कानूनी बाधाओं को दूर कर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई।
- प्रशिक्षण क्षमता में कई गुना वृद्धि की गई।
- बड़े पैमाने पर पारदर्शी भर्ती की गई।
उन्होंने कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की सिफारिश या भेदभाव की गुंजाइश नहीं है।
फोरेंसिक और साइबर सुरक्षा को मिली मजबूती
मुख्यमंत्री ने पुलिस आधुनिकीकरण के तहत किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि:
- पहले प्रदेश में केवल कुछ फोरेंसिक लैब थीं।
- अब कई नए फोरेंसिक केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- हर जिले में साइबर अपराध से निपटने की व्यवस्था मजबूत की गई है।
- साइबर थानों और साइबर डेस्क का विस्तार हुआ है।
युवाओं को रोजगार पर भी बोले मुख्यमंत्री
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने रोजगार के मुद्दे का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि:
- पिछले वर्षों में लाखों युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
- राज्य में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है।
- उद्योगों और MSME सेक्टर के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
- कानून-व्यवस्था में सुधार का सीधा असर निवेश और रोजगार पर पड़ा है।
क्यों चर्चा में है यह बयान?
मुख्यमंत्री का “यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी” वाला बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि यह टिप्पणी उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में की, लेकिन इसके जरिए उन्होंने पुराने प्रशासनिक ढांचे और पुलिस सुधारों की आवश्यकता पर अपनी बात रखने की कोशिश की।
फिलहाल मुख्यमंत्री का यह बयान उत्तर प्रदेश में पुलिस सुधार, प्रशासनिक बदलाव और कानून-व्यवस्था पर चल रही बहस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

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