बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र ने फिल्म इंडस्ट्री में करीब 6 दशकों तक काम किया। इस दौरान एक्टर ने कई सुपरहिट फिल्में दीं, यादगार किरदार जो कभी नहीं भुलाए जा सकते। उनकी फिल्मोग्राफी में शोले, फूल और पत्थर, अनुपमा, चुपके चुपके, सीता और गीता जैसी दर्जनों सफल फिल्में शामिल रहीं। लेकिन उनकी अदाकारी की असली गहराई कुछ ऐसी फिल्मों में दिखाई देती है, जो बॉक्स ऑफिस पर भले न चली हों, लेकिन कला और एक्टिंग के स्तर पर आज भी क्लासिक कही जाती हैं। इस फिल्मोग्राफी में एक ऐसी भी फिल्म शामिल है जो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने के बाद भी नेशनल अवॉर्ड ले आई थी।
धर्मेंद्र की खास फिल्म
1969 में रिलीज़ हुई सत्यकाम का डायरेक्शन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था। फिल्म में धर्मेंद्र के साथ शर्मिला टैगोर, संजीव कुमार, अशोक कुमार और रोबी घोष जैसे बड़े कलाकार शामिल थे। कहानी आज़ादी के तुरंत बाद के भारत की है, जहां आदर्शवादी युवा सत्यप्रिय आचार्य सच, ईमानदारी और नैतिकता के रास्ते पर चलने की कसम खाता है। वो समाज में बदलाव लाना चाहता है। फिल्म उसके संघर्ष, परिवार, रिश्तों और सच्चाई की कीमत चुकाने की उस यात्रा को दिखाती है जो आज भी उतनी ही खास है। ये किरदार धर्मेंद्र ने निभाया था।

नेशनल अवॉर्ड
फिल्म सत्यकाम थिएटर पर फ्लॉप रही। एक्शन और रोमांस के दौर में एक आदर्शवादी सत्यप्रिय ऑडियंस को थिएटर तक ला पाने में फेल हुआ था। उस समय ऑडियंस की पसंद भी अलग थी और ये फिल्म फ्लॉप साबित हुई। लाखों रुपए में बनी ये फिल्म अपना बजट भी नहीं निआल पाई थी। हालांकि, फिल्म क्रिटिक्स ने इसे खास बताया और इसी खासियत के लिए फिल्म सत्यकाम ने नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किया था। बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड इस फिल्म ने जीता था। फिल्म के डायलॉग लिखने वाले राजिंदर बेदी ने भी नेशनल अवॉर्ड जीता था।
बेस्ट परफॉरमेंस
समय के साथ सत्यकाम को धर्मेंद्र के करियर की अब तक की सबसे असरदार, ईमानदार और गहरी परफॉर्मेंस माना जाता है। उनके चेहरे के भाव, डायलॉग का वजन, और किरदार में सच्चाई भर देने का उनका अंदाज़ सत्यकाम को को खास बनाता है।

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