January 17, 2026

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छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार पोला आज..

बच्चे मिट्टी के बैल दौड़ाएंगे, किसान करेंगे औजारों की पूजा!

रायपुर/दि बीबीसी लाइव/ अरविंद साहू :

छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार पोला आज मनाया जा रहा है। गली-मोहल्लों व गांवों में बच्चे मिट्टी के बैल चलाएंगे।
बाजारों में मिट्‌टी के बैल और अन्य सामान खरीदने ग्रामीणों की खूब भीड़ रही।

आज घरों में ठेठरी-खुर्मी जैसे विशेष पकवान बनाकर त्योहार मनाया जाता है। किसानों ने पूजन-अर्चना के लिए कृषि औजारों की सजावट, बैलों का शृंगार किया है।
देर-रात तक शहर व ग्रामीण अंचलों में पोला का बाजार सजा रहा। शहर के चौक चौराहों के साथ साथ जगह- जगह पर नांदिया बैल व पोला- जाता की दुकानें लगी है।

नांदिया बैल की बिक्री करने पहुंचे कुंभहारो ने बताया कि मिट्‌टी के बैल 30 से 50 रुपए प्रति जोड़ी बिकी है। कहीं खास सजावट वाले मिट्‌टी के बैल 80-100 रुपए तक बिके। इसके अलावा मिट्टी से बने पोला और खिलौने मटका, कढ़ाई अन्य प्रकार के मिट्टी के बर्तनों की दुकानें बाजार में सजी रही।

आज पोला पर किसान परिवारों में सुबह गाय-बैलों का स्नान-शृंगार किया गया। सींग और पैरों में महाउर लगाए। गले में घुंघरू, घंटी पहनाई गई। घरों में ठेठरी-खुर्मी और गुड़ चीला जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाए जा रहे हैं।

आपको बता दें की मान्यता है कि पोला पर्व के दिन किसान खेतों में नहीं जाते, अपना काम बंद रखते हैं। इस दिन अन्न माता गर्भ धारण करती हैं। धान के पौधों में दूध भरता है। आज तीजा, पोला पर्व पर बेटियों का मायके आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा!

पंड़ितों के मुताबिक भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अगस्त को दोपहर 3 : 20 बजे से प्रारंभ होगी। जो अगले दिन 30 अगस्त को दोपहर 3 : 33 बजे तक रहेगा। हरतालिका तीज के दिन सुबह 6 बजकर 05 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 38 मिनट और शाम 6 बजकर 33 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 51 मिनट तक पूजन का उत्तम मूहूर्त रहेगा।

जाने पोला क्यों मनाया जाता है..

पोला खरीफ की खेती का दूसरा चरण निंदाई- गाेड़ाई का काम पूरा होने की खुशी में मनाया जाता है। किसान फसल बढ़ने की खुशी में बैलों की पूजा कर उनके प्रति कृतज्ञता जताते हैं।