August 30, 2026

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बांध टूटने से मचा हाहाकार! दरार की सूचना के बाद भी नहीं हुई मरम्मत, खेतों में डूबी किसानों की धान की फसल

रामानुजगंज। रामचंद्रपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत तेतरडीह में कृषि विभाग के बांध के टूटने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बांध टूटने के बाद पानी आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे किसानों की खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि बांध में दरार पहले ही दिखाई दे रही थी और इसकी सूचना संबंधित विभाग तक पहुंचाई गई थी, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई।

बारिश के साथ बांध में पानी का स्तर बढ़ता गया। पानी का दबाव बढ़ने के कारण पहले से मौजूद दरार और चौड़ी होती गई। ग्रामीणों के मुताबिक, स्थिति लगातार गंभीर होने के बावजूद मौके पर ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे बांध को टूटने से बचाया जा सके।

आखिरकार बांध टूट गया और पानी खेतों की ओर फैल गया। देखते ही देखते आसपास के किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। धान की खड़ी फसल पानी की चपेट में आने से किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।

पहले से थी खतरे की जानकारी, फिर भी क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि बांध में दरार की जानकारी पहले ही संबंधित विभाग को मिल गई थी, तो उसकी मरम्मत समय रहते क्यों नहीं कराई गई?

ग्रामीणों का कहना है कि बांध की स्थिति बारिश के दौरान लगातार बिगड़ रही थी। ऐसे में समय रहते निरीक्षण और मरम्मत कर दी जाती तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।

किसानों का कहना है कि अब नुकसान होने के बाद प्रशासन की ओर से सर्वे और आकलन की बात कही जा रही है, लेकिन असली जरूरत इस बात की जांच करने की है कि खतरे की सूचना मिलने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कदम उठाए थे।

किसानों की फसल बर्बाद, अब मुआवजे की उम्मीद

बांध टूटने के बाद खेतों में पानी भरने से किसानों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। धान की फसल किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में फसल खराब होने से परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन कराया जाना बताया जा रहा है। किसानों को उम्मीद है कि सर्वे के दौरान वास्तविक नुकसान को दर्ज किया जाएगा और पात्र प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत मिलेगी।

किसानों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • प्रभावित खेतों का जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए।
  • धान की फसल को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए।
  • पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए।
  • बांध टूटने के कारणों की निष्पक्ष जांच की जाए।
  • दरार की सूचना मिलने के बाद विभाग की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी सामने लाई जाए।
  • क्षेत्र के अन्य बांधों की भी जांच कर जरूरी मरम्मत कराई जाए।

मानसून पूर्व तैयारियों पर उठे सवाल

तेतरडीह में बांध टूटने की घटना ने मानसून पूर्व तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश शुरू होने से पहले प्रशासनिक स्तर पर बांधों, जलाशयों, नालों और अन्य संवेदनशील स्थानों की स्थिति की समीक्षा की जाती है।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संबंधित बांध का समय रहते निरीक्षण किया गया था? यदि निरीक्षण हुआ था तो दरार की स्थिति सामने क्यों नहीं आई? और यदि ग्रामीणों की सूचना पहले मिल गई थी, तो उसके बाद मरम्मत का काम क्यों नहीं कराया गया?

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बांध टूटने से केवल पानी का बहाव नहीं बढ़ता, बल्कि आसपास के खेतों, रास्तों और ग्रामीण इलाकों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सिर्फ नुकसान का आकलन काफी नहीं

प्रशासन के लिए फिलहाल सबसे जरूरी काम प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाना है। लेकिन इसके साथ घटना की वजह और जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी है।

यदि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं और यह पुष्टि होती है कि दरार की जानकारी पहले ही विभाग तक पहुंच गई थी, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि सूचना पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

किसानों का कहना है कि नुकसान होने के बाद मुआवजा देना जरूरी है, लेकिन उससे भी बेहतर व्यवस्था वह होती है जिसमें समय रहते खतरे को रोक लिया जाए।

अब जवाबदेही पर टिकी नजर

तेतरडीह में बांध टूटने की घटना के बाद किसानों और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। क्या केवल फसल नुकसान का सर्वे होगा या बांध की स्थिति और कथित लापरवाही की भी जांच होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

इस घटना ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—जब बांध में दरार दिखाई दे रही थी और इसकी सूचना भी संबंधित विभाग तक पहुंचने की बात कही जा रही है, तो समय रहते मरम्मत क्यों नहीं हुई?

अब जरूरत है कि प्रभावित किसानों को जल्द राहत मिले, नुकसान का पारदर्शी आकलन हो और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्षेत्र के सभी संवेदनशील बांधों की जांच और जरूरी