August 30, 2026

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सुभाष चंद्रा को ₹22,000 करोड़ के कर्ज से बड़ी राहत! सिर्फ ₹6.5 करोड़ में सेटलमेंट, कांग्रेस ने कहा- ‘हेयरकट नहीं, सीधा मुंडन’

मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा एक बार फिर बड़े वित्तीय मामले को लेकर चर्चा में हैं। उनके खिलाफ चल रहे व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े करीब ₹22,006.57 करोड़ के दावे के मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। इस प्लान के तहत करीब ₹6.5 करोड़ का भुगतान किया जाना है।

सबसे ज्यादा हैरानी इस बात को लेकर हो रही है कि दावे की रकम और प्रस्तावित भुगतान के बीच बहुत बड़ा अंतर है। इसी वजह से NCLT के फैसले ने बैंकिंग सेक्टर, कर्ज वसूली और इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

₹22,000 करोड़ के दावे के बदले ₹6.5 करोड़

मामले के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।

  • संबंधित दावा करीब ₹22,006.57 करोड़ का है।
  • मंजूर किए गए प्लान में भुगतान की रकम करीब ₹6.5 करोड़ है।
  • यह कुल दावे का लगभग 0.03 प्रतिशत बैठता है।
  • यानी दोनों रकम के बीच करीब 99.97 प्रतिशत का अंतर है।
  • मंजूर रकम को नियमों के मुताबिक संबंधित बैंकों और अन्य लेनदारों के बीच बांटा जाएगा।

यही वजह है कि राजनीतिक दलों से लेकर सोशल मीडिया तक इस फैसले पर सवाल और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

क्या सुभाष चंद्रा ने खुद लिया था ₹22,000 करोड़ का लोन?

इस मामले को समझने के लिए एक अहम बात जानना जरूरी है। ₹22,000 करोड़ की रकम को सीधे तौर पर सुभाष चंद्रा का व्यक्तिगत कर्ज कहना सही नहीं होगा।

यह मामला व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है। जब किसी कंपनी को बैंक या वित्तीय संस्थान से कर्ज मिलता है, तो कई बार कंपनी का प्रमोटर उस कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी देता है।

एस्सेल ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के कर्ज के मामले में सुभाष चंद्रा ने ऐसी गारंटी दी थी। कंपनियों के कर्ज चुकाने में असफल रहने के बाद संबंधित दावे उनकी व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े मामले में आए।

इसलिए पूरे मामले को कंपनी के कर्ज और प्रमोटर की व्यक्तिगत गारंटी के संदर्भ में समझना ज्यादा सही होगा।

कांग्रेस ने फैसले पर उठाए सवाल

NCLT के फैसले के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और इंसॉल्वेंसी व्यवस्था पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।

उनका कहना है कि इंसॉल्वेंसी के नाम पर इतनी बड़ी रकम का अंतर सामान्य ‘हेयरकट’ नहीं बल्कि बैंकों का ‘मुंडन’ है।

कांग्रेस का सवाल यह है कि अगर बैंकों के दावे का इतना छोट