July 27, 2026

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BSc एग्रीकल्चर की पढ़ाई के बाद नौकरी नहीं, चुना सूकरपालन का रास्ता; ग्रेसी ने 400 सूकरों के फार्म से खड़ी की करोड़ों की सफलता की कहानी

Focus Keyword: आधुनिक सूकरपालन


रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की एक युवा महिला ने अपनी शिक्षा और आधुनिक सोच के दम पर स्वरोजगार की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने नौकरी की राह छोड़कर आधुनिक सूकरपालन को अपना व्यवसाय बनाया और आज उनका फार्म बड़े व्यावसायिक मॉडल के रूप में पहचान बना चुका है।

बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली ग्रेसी ने सरकारी सहायता, वैज्ञानिक तकनीक और मेहनत के बल पर एक करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित की है। वर्तमान में उनके फार्म में 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं।

पढ़ाई के बाद चुना स्वरोजगार का रास्ता

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा या नौकरी के बजाय उन्होंने अपनी कृषि शिक्षा का उपयोग करते हुए खुद का उद्यम शुरू करने का फैसला लिया।

उन्होंने सूकरपालन को इसलिए चुना क्योंकि—

  • बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी।
  • व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में कम लोग काम कर रहे थे।
  • सूकरपालन में कम समय में बेहतर उत्पादन की संभावना है।
  • ग्रामीण क्षेत्र में यह रोजगार का मजबूत माध्यम बन सकता है।

नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख की सब्सिडी

ग्रेसी को बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना का लाभ मिला।

इस योजना के तहत—

  • परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है।
  • ग्रेसी को पहली बार आवेदन करने पर 30 लाख रुपये की सहायता राशि मिली।

पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन में उनकी 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की आधुनिक सूकरपालन परियोजना तैयार की गई, जिसे योजना के तहत मंजूरी मिली।

ग्रेसी बताती हैं कि यदि सरकारी सहायता नहीं मिलती तो वह केवल 20-25 सूकरों से छोटे स्तर पर शुरुआत कर पातीं, लेकिन योजना के सहयोग से उन्हें बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर मिला।

आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ हाईटेक फार्म

ग्रेसी के फार्म में पशुपालन विभाग और कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाया जा रहा है।

फार्म की खास बातें—

  • उन्नत नस्ल के सूकरों का पालन।
  • नियमित टीकाकरण व्यवस्था।
  • संतुलित पोषण प्रबंधन।
  • स्वास्थ्य की लगातार निगरानी।
  • वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली।

फार्म के लिए तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए।

110 सूकरों से शुरू हुआ सफर, अब 400 से ज्यादा पशु

ग्रेसी ने मई 2025 में अपने फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से की थी।

इनमें शामिल थे—

  • 100 मादा सूकर
  • 10 नर सूकर

वैज्ञानिक देखभाल और बेहतर प्रबंधन के परिणामस्वरूप जून 2026 तक फार्म में—

  • 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर
  • लगभग 206 पिगलेट

तैयार हो चुके हैं।

आज उनके फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर हैं, जो उनकी मेहनत और आधुनिक तकनीक की सफलता को दर्शाते हैं।

पहली बिक्री में ही कमाए करीब 4 लाख रुपये

ग्रेसी दुग्गा के फार्म से अब व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो गई है।

उन्होंने हाल ही में—

  • 65 पिगलेट्स बेचे।
  • प्रति पिगलेट 6 हजार रुपये की दर मिली।
  • कुल 3 लाख 90 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।

यह बताता है कि वैज्ञानिक तरीके से किया गया सूकरपालन युवाओं के लिए लाभकारी व्यवसाय बन सकता है।

सूकरपालन क्यों बन रहा है रोजगार का बेहतर विकल्प?

विशेषज्ञों के अनुसार सूकरपालन तेजी से बढ़ता हुआ व्यवसाय है।

इसके प्रमुख कारण—

  • सूकरों की प्रजनन क्षमता अधिक होती है।
  • मादा सूअर एक बार में 8 से 12 बच्चों को जन्म दे सकती है।
  • पिगलेट्स कम समय में बिक्री योग्य हो जाते हैं।
  • बाजार में मांस की मांग लगातार बनी हुई है।
  • कम क्षेत्र में भी व्यवसाय शुरू किया जा सकता है।

बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

ग्रेसी दुग्गा की सफलता यह साबित करती है कि कृषि शिक्षा और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर युवा अपने क्षेत्र में बड़े उद्यम खड़े कर सकते हैं।

पशु चिकित्सा विभाग का सहयोग, सरकार की वित्तीय सहायता और ग्रेसी की मेहनत ने मिलकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो बस्तर के अन्य युवाओं को भी कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

आधुनिक सूकरपालन के जरिए ग्रेसी ने साबित कर दिया है कि गांवों में भी बड़े स्तर के सफल व्यवसाय खड़े किए जा सकते हैं और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।