छत्तीसगढ़ में सहकारी गृह निर्माण समितियों से जुड़े बहुचर्चित प्लॉट घोटाले में बड़ा मोड़ आ गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने कथित आर्थिक अनियमितताओं, भूखंडों की संदिग्ध बिक्री और करोड़ों रुपये के नुकसान के मामले में तत्कालीन वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं परिसमापक राजकुमार नायडू के खिलाफ विशेष अदालत में चालान पेश कर दिया है।
जांच एजेंसी ने करीब 3500 पृष्ठों का विस्तृत अभियोग पत्र भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत, रायपुर में दाखिल किया है। इस कार्रवाई को मामले में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति माना जा रहा है।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?
ईओडब्ल्यू ने आरोपी के खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
- आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धारा 409।
- धोखाधड़ी से संबंधित धारा 420।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएं।
- पद के दुरुपयोग और आर्थिक लाभ पहुंचाने से जुड़े प्रावधान।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी पद पर रहते हुए अधिकारों का दुरुपयोग कर सहकारी समितियों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
भूखंडों की बिक्री में नियमों की अनदेखी का आरोप
जांच के दौरान सामने आया कि राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) गृह निर्माण समिति में पहले से आबंटित और पंजीकृत 13 भूखंडों का पंजीयन निरस्त कराया गया।
इसके बाद कथित तौर पर नए सदस्यों को शामिल कर इन भूखंडों को निर्धारित बाजार मूल्य से कम दर पर बेच दिया गया।
जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि सड़क और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि को भी नियमों के विपरीत बेच दिया गया, जिससे समिति को करोड़ों रुपये की क्षति हुई।
दूसरी समिति में भी सामने आईं गड़बड़ियां
जांच के दौरान एक अन्य गृह निर्माण समिति में भी कई अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
मुख्य आरोपों में शामिल हैं:
- एक ही परिवार के कई सदस्यों को भूमि आवंटन।
- पूर्ण भुगतान के बावजूद मूल सदस्य को भूखंड नहीं देना।
- उसी भूखंड का किसी अन्य व्यक्ति के नाम पंजीयन करना।
- समिति के नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी।
इन मामलों ने सहकारी समितियों के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े किए हैं।
बैंक खाते से राशि के निजी उपयोग का आरोप
ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार, भूखंडों की बिक्री से प्राप्त राशि और संस्था के बैंक खाते से निकाली गई रकम का निजी उपयोग किए जाने के संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में 20 लाख रुपये से अधिक राशि के गबन के साक्ष्य मिले हैं। दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर इन आरोपों की पुष्टि किए जाने का दावा किया गया है।
चार करोड़ रुपये से अधिक आर्थिक नुकसान का दावा
जांच रिपोर्ट के मुताबिक कथित अनियमितताओं और विवादित सौदों के कारण संबंधित गृह निर्माण समितियों को चार करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई है।
यही कारण है कि मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए विस्तृत जांच के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है।
अब अदालत में होगी सुनवाई
विशेष अदालत में चालान दाखिल होने के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर मामले की सुनवाई की जाएगी।
यह मामला सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।
नोट: मामले में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी के दस्तावेजों और अदालत में प्रस्तुत अभियोग पत्र पर आधारित हैं। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा।

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