बाल कल्याण सूचकांक
रायपुर में राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ इंडिया के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में बच्चों के भविष्य, सामाजिक विकास और समावेशी नीति निर्माण को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने के लिए बच्चों को विकास की मुख्यधारा में केंद्र स्थान देने पर जोर दिया गया। इस दौरान देश में पहली बार राज्य स्तर पर बाल कल्याण सूचकांक विकसित करने की महत्वाकांक्षी पहल पर भी चर्चा हुई, जिसे भविष्य में राष्ट्रीय मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष Ganesh Shankar Mishra से यूनिसेफ इंडिया के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नवा रायपुर स्थित नीति भवन में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख Soledad Herrero ने किया।
विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होंगे बच्चे
बैठक के दौरान गणेश शंकर मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी पूरा होगा जब राज्य के प्रत्येक बच्चे को स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुरक्षा की गारंटी मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बच्चे केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि राज्य के भविष्य और विकास की वास्तविक आधारशिला हैं। इसी सोच के तहत विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क में बाल कल्याण को एक स्वतंत्र और महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया है।
विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क की प्रमुख विशेषताएं
- 50 से अधिक विभागों के लिए प्रदर्शन संकेतक तैयार।
- बाल कल्याण को अलग विषय क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया।
- डेटा आधारित नीति निर्माण पर जोर।
- सामाजिक और आर्थिक विकास की निरंतर निगरानी।
देश में पहली बार बनेगा बाल कल्याण सूचकांक
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि राज्य-विशिष्ट बाल कल्याण सूचकांक और बाल वंचना सूचकांक विकसित करने की पहल रही।
यह सूचकांक सरकार को यह समझने में मदद करेगा कि किन क्षेत्रों में बच्चों तक सेवाएं सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं और किन नीतियों में सुधार की आवश्यकता है।
इस पहल से होंगे कई फायदे
- बच्चों की वास्तविक स्थिति का आकलन।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण की कमियों की पहचान।
- बाल-केंद्रित योजनाओं को मजबूत बनाने में मदद।
- बजट और संसाधनों का बेहतर उपयोग।
- नीति निर्माण में पारदर्शिता और प्रभावशीलता।
यूनिसेफ प्रतिनिधिमंडल ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया।
नीति और जमीन के बीच बनेगा मजबूत सेतु
राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ के सहयोग से स्थापित विकसित छत्तीसगढ़ सामाजिक नीति सहयोग इकाई (VC-SPS Unit) को भी बैठक में विशेष महत्व दिया गया।
यह इकाई:
- साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देती है।
- बाल कल्याण से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करती है।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत बनाने में मदद करती है।
- विभागों को तकनीकी सहयोग प्रदान करती है।
बैठक में इस इकाई को और अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति बनी।
बस्तर अंजोर कार्यक्रम पर विशेष चर्चा
बैठक में बस्तर अंजोर कार्यक्रम को आदिवासी और बाल विकास के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया गया।
यह कार्यक्रम बस्तर संभाग के सातों जिलों में संचालित किया जाएगा और इसका उद्देश्य स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करना है।
बस्तर अंजोर की प्रमुख विशेषताएं
- सात जिलों को कवर करने वाला समन्वित कार्यक्रम।
- 3+4 मॉडल पर आधारित कार्यप्रणाली।
- बच्चों और आदिवासी समुदायों पर विशेष फोकस।
- स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक संरक्षण पर 90 प्रतिशत से अधिक हस्तक्षेप।
यूनिसेफ ने इस कार्यक्रम को संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में विकास पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल बताया।
सामुदायिक जागरूकता पर रहेगा जोर
बैठक में यह भी माना गया कि केवल योजनाएं और बजट पर्याप्त नहीं हैं। जब तक समुदाय का विश्वास नहीं बढ़ेगा और लोगों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव नहीं आएगा, तब तक विकास के लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सकते।
इसीलिए यूनिसेफ की विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए:
- पोषण जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
- बाल संरक्षण पर समुदायों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
- शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
- स्थानीय नेतृत्व को मजबूत किया जाएगा।
यूनिसेफ ने बढ़ाया सहयोग का दायरा
यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सोलेदाद हेरेरो ने कहा कि यूनिसेफ वर्ष 2019 से छत्तीसगढ़ सरकार का विश्वसनीय साझेदार रहा है और आने वाले समय में यह सहयोग और मजबूत होगा।
उन्होंने बाल कल्याण, सार्वजनिक वित्त, सामाजिक जागरूकता और बस्तर अंजोर जैसे कार्यक्रमों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

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