छत्तीसगढ़ की जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगने जा रहा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने नए वित्तीय वर्ष के लिए बिजली दरों में औसतन 6.23 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दे दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में लागू होंगी। ऐसे समय में जब आम लोग पहले से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, बिजली बिल में यह बढ़ोतरी घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली है।
बिजली वितरण कंपनी ने आयोग के समक्ष करीब 24 प्रतिशत तक बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि आयोग ने इस प्रस्ताव को कम करते हुए औसतन 6.23 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को हर महीने अधिक बिजली बिल चुकाना पड़ेगा।
किन उपभोक्ताओं पर कितना असर?
नई दरों का प्रभाव अलग-अलग वर्गों पर दिखाई देगा।
- घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में लगभग 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि।
- व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी।
- कृषि पंप उपयोग करने वाले किसानों के लिए लगभग 40 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त खर्च।
- छोटे उद्योग और दुकानदारों की संचालन लागत में भी वृद्धि की संभावना।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली दर बढ़ने से केवल बिजली बिल ही नहीं बढ़ता, बल्कि इसका असर बाजार की अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ता है।
महंगाई के बीच बढ़ी चिंता
प्रदेश में आम नागरिक पहले ही बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है। परिवहन महंगा होने से बाजार में पहुंचने वाले सामान की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।
महंगाई का असर इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है:
- घरेलू रसोई का बजट
- किसानों की खेती लागत
- छोटे व्यापारियों का खर्च
- नौकरीपेशा लोगों की मासिक बचत
- ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति
ऐसे में बिजली बिल में बढ़ोतरी लोगों की चिंता को और बढ़ाने वाली है।
पिछले तीन वर्षों में लगातार बढ़ीं दरें
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बिजली टैरिफ में लगातार संशोधन किए गए हैं।
- वर्ष 2024-25 : औसतन 8.35 प्रतिशत वृद्धि
- वर्ष 2025-26 : लगभग 1.89 प्रतिशत वृद्धि
- वर्ष 2026-27 : औसतन 6.23 प्रतिशत वृद्धि
इस तरह तीन वर्षों में लगातार बिजली दरों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार का तर्क है कि उत्पादन, खरीद और वितरण लागत बढ़ने के कारण यह फैसला आवश्यक है। वहीं विपक्ष और आम उपभोक्ता इसे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहे हैं।
आम आदमी पूछ रहा बड़ा सवाल
सरकार विकास और बेहतर सुविधाओं के दावे कर रही है, लेकिन बढ़ती महंगाई के बीच आम नागरिक राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। गृहिणियों, किसानों, कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों का कहना है कि आय की तुलना में खर्च तेजी से बढ़ रहा है।
जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बिजली, ईंधन और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं लगातार महंगी हो रही हैं, तब आम आदमी को राहत कब मिलेगी?
आने वाले दिनों में लोगों की नजर सरकार के उन कदमों पर रहेगी, जो बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम करने और आम नागरिकों को राहत देने के लिए उठाए जाएंगे। फिलहाल इतना तय है कि 1 जुलाई से बिजली बिल बढ़ने के साथ हर परिवार के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव महसूस होगा।

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