रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर में आयोजित पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं। उन्होंने बताया कि पत्रकार समाज को सही दिशा दिखाते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाकर प्रशासन और सरकार को आत्ममंथन का अवसर देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने रायपुर प्रेस क्लब की तारीफ करते हुए इसे देश के प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में शामिल बताया और इस आयोजन के लिए क्लब को बधाई दी।
पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास
मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि 1826 में कोलकाता से प्रकाशित उदंत मार्तंड भारत का पहला हिंदी समाचार पत्र था। इसके माध्यम से भारतीय पत्रकारिता ने मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक जागरण का महत्वपूर्ण साधन रही है।
मुख्यमंत्री ने कई प्रमुख पत्रकारों और संपादकों जैसे मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र का स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने पत्रकारिता की वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया।
पत्रकारों की समाज में भूमिका
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा:
- पत्रकार कठिन परिस्थितियों में सत्य और तथ्य जनता तक पहुंचाते हैं।
- मीडिया की सकारात्मक आलोचना प्रशासन और सरकार के लिए सुधार का माध्यम है।
- पत्रकारिता शांति, विकास और मुख्यधारा की ओर लोगों को प्रेरित करने का कार्य करती है।
- पत्रकारिता ने बस्तर में सकारात्मक बदलाव और पर्यटन, विकास की नई पहचान बनाने में योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने में पत्रकारों की भूमिका अहम रही।
स्वतंत्रता आंदोलन और पत्रकारिता
मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस ने पत्रकारिता का उपयोग समाज जागरण और राष्ट्र चेतना के लिए किया। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के माधवराव सप्रे का उल्लेख किया, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को जागरूक और संगठित किया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना जगाई, जिसने लाखों लोगों को प्रेरित किया।
पत्रकारिता का भविष्य और सामाजिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. के.जी. सुरेश ने कहा कि समय के साथ पत्रकारिता को बदलती तकनीकों के अनुरूप विकसित होना होगा। सोशल मीडिया और नागरिक पत्रकारिता ने नई चुनौतियां पैदा की हैं, इसलिए पत्रकारिता को शोधपरक, तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित बनाए रखना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान देने वालों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया और हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर प्रकाशित नवप्रदेश के विशेष अंक का विमोचन किया।
मुख्य बिंदु
- पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं।
- पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक जागरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
- मीडिया प्रशासन और सरकार को सुधार की दिशा दिखाता है।
- पत्रकारिता का भविष्य शोधपरक और तथ्य आधारित होना चाहिए।
- राज्य सरकार ने मीडिया के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई।
इस अवसर पर वित्त मंत्री, राज्य पदाधिकारी, प्रेस क्लब के सदस्य और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

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