मंडी विभाग निष्क्रिय, व्यापारियों की मिलीभगत से शासन को रोजाना लाखों करोड़ के राजस्व का हो रहा नुकसान!
सरायपाली //दि बीबीसी लाइव :
राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में उन्हें सही भाव मिल पाए इसलिए कृषि उपज मंडी बोर्ड का गठन किया गया था।
जनप्रतिनिधियों में मंडी अध्यक्ष भी शामिल है बावजूद किसानों के हित में कोई बात करने कतरा रहे है।
आपको बता दें कि पिछले कई सालों से कृषि उपज मंडी में नीलामी प्रथा बंद है देखने को मिल रहा है कि व्यापारियों की सांठगांठ के चलते किसान को अपनी सही कीमत धान की नहीं मिल पा रही है।
सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर सौदा पत्रक काटा जा रहा है?
नीलामी प्रथा बंद हो चुकी है या क्यों बंद हुई है? इसका जवाब भी नहीं मिल पा रहा है!
आरोप मंडी में लग रहा है कि, कुछ राइस मिलर्स और कुछ व्यापारियों के सांठगांठ मिलीभगत से शासन को रोजाना राजस्व की लाखों-करोड़ों की हानि हो रही है।
धान की सही बोली/कीमत मंडी में नहीं लग पाने के चलते किसानों को फायदा नहीं मिल रहा है जिससे किसान ठगा महसूस कर रहा है।
विकासखंड सरायपाली क्षेत्र में करीब 40से 50 फड़ लग रहे हैं लेकिन इसकी भी पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है। जबकि मात्र 20 से 25व्यापारियों ही रजिस्टर्ड बताए जा रहे हैं।
आपको बता दें कि अवैध धान पकड़ने के लिए एक शिकायत के आधार पर सौदा पत्रक के नाम पर जो ट्रकों में धान लोड होकर जा रही है उससे मंडी के ही कर्मचारी 10 से ₹20000 से भी ज्यादा वसूली कर ट्रकों को छोड़ रहे हैं! अब तक एक भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है।
ऑनलाइन सौदा पत्रक होने के चलते व्यापारी और मंडी बोर्ड की मिलीभगत से छत्तीसगढ़ का धान उड़ीसा सप्लाई हो रहा है।
नई कृषि उपज मंडी सरायपाली से क्षेत्र के किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। इस मंडी में न किसान पहुंचते है और न ही व्यापारी।
सौदा पत्रक (किसान और व्यापारी के बीच लेन-देन का समझौता) में ही मंडी प्रशासन की अध्यक्षता भर है।
वहीं कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर केवल धान की खरीदारी होती है, जो बमुश्किल दो माह चलती होगी। बाकी 10 महीने मंडी में सन्नाटा पसरा रहता है।
कृषि मंडी में किसानों और व्यापारियों के न पहुंचने की दलील मंडी प्रांगण में गोदाम न होने को बताया जा रहा है। इसका खामियाजा क्षेत्र के किसानों को उठाना पड़ रहा है।
क्या होता है सौदा पत्रक —
सौदा पत्रक एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसान अपनी मर्जी से कहीं भी किसी भी अनाज व्यापारी को अपना अनाज बेच देता है और व्यापारी को उस खरीदे हुए अनाज की जानकारी मंडी प्रशासन को देना होती है। इस प्रक्रिया में वो ही अनाज व्यापारी शामिल होता है जो इस मंडी में रजिस्टर्ड है। सौदा पत्रक में मंडी प्रशासन का कोई खास कार्य भी नहीं होता। वह सिर्फ निगरानी भर कर सकते हैं। सौदा पत्रक में जमाखोरी या कालाबाजारी से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

More Stories
Women’s T20 World Cup 2026: पाकिस्तान के बाद अब नीदरलैंड्स की बारी! आज दूसरी जीत के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया
नकली शराब सिंडिकेट पर रायगढ़ पुलिस का बड़ा एक्शन! फरार मास्टरमाइंड के घर चस्पा किया नोटिस, 3 दिन में हाजिर होने का अल्टीमेटम
छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए बनेगा देश का पहला ‘बाल कल्याण सूचकांक’! यूनिसेफ और राज्य नीति आयोग की बड़ी पहल