नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। हिमालयी क्षेत्र में अचानक आई इस आपदा के बाद मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है और हजारों लोगों के अब भी लापता होने की बात सामने आ रही है। राहत और बचाव अभियान के साथ अब नेपाल ने इस आपदा की भरपाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
नेपाल सरकार का कहना है कि यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े बढ़ते जोखिमों का परिणाम है। इसी आधार पर काठमांडू अब तत्काल सहायता के बजाय जलवायु न्याय और मुआवजे की मांग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की तैयारी कर रहा है।
बाढ़ में 1,127 लोगों की मौत का दावा
नेपाल पुलिस के अनुसार, बुधवार 2 सितंबर तक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई। करीब 3,900 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं।
प्रमुख आंकड़े इस प्रकार बताए गए हैं:
चितवन से 348 शव
नवलपरासी पूर्व से 217 शव
नवलपरासी पश्चिम से 190 शव
नुवाकोट से 155 शव
गोरखा से 66 शव
धादिंग से 59 शव
रसुवा से 45 शव
तनाहूं से 38 शव
लापता लोगों की तलाश के लिए बचावकर्मी लगातार अभियान चला रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन को बताया तबाही की बड़ी वजह
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने रसुवा में भोटेकोशी नदी की तबाही को जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हुए हिमालयी क्षेत्र के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया की मांग की है।
उन्होंने कहा कि हिमालय के तापमान में करीब 1.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि ने आपदा में योगदान दिया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने से अचानक पानी का तेज बहाव पैदा हुआ, जिसने नीचे के इलाकों में भारी नुकसान किया।
सरकार का कहना है कि अब प्राथमिकता धीरे-धीरे खोज और बचाव से हटकर राहत के बाद पुनर्वास की ओर बढ़ रही है।
नेपाल अब मांग रहा है मुआवजा
नेपाल ने जलवायु आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की मांग को एक नए स्तर पर ले जाने के संकेत दिए हैं। सरकार का तर्क है कि जिन देशों का ऐतिहासिक और मौजूदा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन अधिक है, उन्हें जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित कमजोर देशों के लिए आर्थिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
नेपाल ने भारत, चीन और अमेरिका को बड़े उत्सर्जकों में शामिल करते हुए मुआवजे की मांग की है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, काठमांडू अपनी कूटनीतिक रणनीति को केवल सहायता मांगने से आगे बढ़ाकर न्याय और मुआवजे की दिशा में ले जाना चाहता है।
UN में उठेगा Climate Justice का मुद्दा
नेपाल ने तत्काल वित्तीय सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र समर्थित लॉस एंड डैमेज फंड से संपर्क किया है।
अब उसकी कोशिश है कि इस आपदा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर जलवायु न्याय की मांग को मजबूती दी जाए।
नेपाल का तर्क है कि वैश्विक उत्सर्जन में उसका योगदान बहुत कम है, लेकिन हिमालयी देश होने के कारण उसे ग्लेशियरों के पिघलने, पहाड़ी ढलानों के अस्थिर होने और अचानक आने वाली बाढ़ जैसे खतरों का गंभीर सामना करना पड़ रहा है।
तबाही की भरपाई में लग सकते हैं 4-5 अरब डॉलर
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के अनुसार, बाढ़ से हुई तबाही की भरपाई के लिए देश को करीब 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है।
यह राशि नेपाल की अर्थव्यवस्था के लगभग 10 प्रतिशत के बराबर बताई गई है।
बाढ़ से घरों के साथ-साथ सड़कें, पुल और पनबिजली परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। हजारों लोगों के सामने दोबारा घर और रोजी-रोटी खड़ी करने की चुनौती है।
UNGA में खुद बालेन शाह रख सकते हैं नेपाल का पक्ष
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह के आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में शामिल होने की संभावना को लेकर चर्चा है।
बताया जा रहा है कि यदि वह न्यूयॉर्क जाते हैं तो रसुवा बाढ़, जलवायु न्याय और मुआवजे का मुद्दा सीधे वैश्विक मंच पर उठा सकते हैं।
पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री शिशिर खनाल द्वारा किए जाने की योजना थी। लेकिन बाढ़ की गंभीरता के बाद प्रधानमंत्री के स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
नेपाल की मांग के पीछे क्या तर्क है?
हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव झेल रहा है।
नेपाल का वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में योगदान बेहद कम है।
बाढ़ से बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है।
सरकार राहत से आगे बढ़कर पुनर्वास पर ध्यान दे रही है।
नेपाल चाहता है कि Climate Justice को अंतरराष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाया जाए।
लॉस एंड डैमेज फंड से आर्थिक सहायता की मांग की गई है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल अपनी मांग को किस तरह रखता है और भारत, चीन तथा अमेरिका समेत बड़े देशों की इस मुआवजा और जलवायु न्याय की मांग पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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नेपाल बाढ़ में मौतों और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ने के बीच काठमांडू ने जलवायु न्याय और मुआवजे की मांग तेज कर दी है। UNGA में बालेन शाह यह मुद्दा उठा सकते हैं।

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