रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह गरिमापूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों को पूरा करने वाले विद्यार्थियों को कुल 689 डिग्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार और स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के लिए यह दिन उनके शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ पेशेवर जिम्मेदारियों की नई शुरुआत का प्रतीक बना।
डिग्री के साथ मिली बड़ी जिम्मेदारी
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत समारोह सिर्फ उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि जिम्मेदारी स्वीकार करने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थियों को डिग्री मिल रही है, लेकिन आने वाले समय में उन्हें इससे भी बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी। उनके हाथों में लोगों का स्वास्थ्य, भरोसा और जीवन होगा।
उन्होंने नव-स्नातकों से चिकित्सा सेवा में ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
376 छात्राओं और 313 छात्रों को मिली डिग्री
AIIMS Raipur के तीसरे दीक्षांत समारोह में कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।
इनमें:
376 महिला विद्यार्थी
313 पुरुष विद्यार्थी
कुल 689 डिग्री प्रमाण-पत्र
16 मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार और सम्मान
समारोह में विद्यार्थियों, उनके परिवारों, शिक्षकों और संस्थान के अधिकारियों के लिए यह गौरव का अवसर रहा।
मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बना AIIMS
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापना के बाद AIIMS Raipur ने चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ के साथ-साथ आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है।
खास तौर पर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में संस्थान के योगदान को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
किडनी ट्रांसप्लांट से लेकर हृदय प्रत्यारोपण तक
समारोह में AIIMS Raipur की चिकित्सा उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। उपराष्ट्रपति ने संस्थान में हुए छत्तीसगढ़ के पहले किडनी प्रत्यारोपण सहित कई उपलब्धियों की सराहना की।
उन्होंने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट में संस्थान की सफलता दर 95 प्रतिशत से अधिक रही है। इसके अलावा कॉर्नियल ट्रांसप्लांट और कान प्रत्यारोपण जैसी सुविधाओं को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी को भी संस्थान की चिकित्सा क्षमता के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना गया।
छत्तीसगढ़ के विकास का भी किया जिक्र
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के विकास और बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कमजोर कनेक्टिविटी और लंबे समय तक चली हिंसा के कारण विकास की चुनौतियां रही हैं।
उन्होंने कहा कि अब राज्य विकास, निवेश, बेहतर कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने इस परिवर्तन को मजबूत नेतृत्व, सुरक्षा व्यवस्था और विकास आधारित शासन से जोड़ते हुए कहा कि AIIMS Raipur नए छत्तीसगढ़ की संभावनाओं का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन करीब 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब देश के हर राज्य, जिले और गांव में विकास के समान अवसर उपलब्ध हों।
राज्यपाल ने कहा- चिकित्सा का उद्देश्य मानवता की सेवा
राज्यपाल रमेन डेका ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा सिर्फ ज्ञान और तकनीकी कौशल हासिल करने तक सीमित नहीं है। एक डॉक्टर के लिए धैर्य, करुणा और जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा है। डॉक्टर की श्रेष्ठता केवल उसकी पेशेवर दक्षता से नहीं, बल्कि मरीज के साथ उसके व्यवहार, सम्मान और विश्वास से भी तय होती है।
राज्यपाल ने नव-स्नातक चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, शोध और नवाचार में योगदान देने का आह्वान किया।
युवाओं ने ली नशे से दूर रहने की शपथ
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की शपथ भी दिलाई गई। केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने युवा डॉक्टरों को बधाई देते हुए आयुष्मान भारत, PM-JAY, ABHA और e-Sanjeevani जैसी स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख किया।
उन्होंने युवा चिकित्सकों से चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ नैतिकता, करुणा, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान और समाज सेवा को प्राथमिकता देने की अपील की।
AIIMS Raipur की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने का संकल्प
संस्थान के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने AIIMS Raipur की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और पेशेवर कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र की सेवा में करने का आह्वान किया।
समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, AIIMS रायपुर अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
AIIMS Raipur का तीसरा दीक्षांत समारोह 689 विद्यार्थियों के लिए नई जिम्मेदारियों की शुरुआत बनकर सामने आया। अब इन युवा चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से उम्मीद है कि वे अपने ज्ञान, शोध और सेवा के माध्यम से समाज और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।

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