August 29, 2026

खबरों पर नजर हर पहर

कीटनाशक कंपनियों पर बड़ा एक्शन! बालाजी कृषि केन्द्र समेत 34 को नोटिस, बिना प्रमाणन स्टॉक मिलने से मचा हड़कंप

कृषि विभाग ने कसा शिकंजा

छत्तीसगढ़ में कीटनाशकों के भंडारण और प्रमाणन को लेकर कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड में स्थित मेसर्स बालाजी कृषि केन्द्र जांच के दायरे में आया है। यहां अलग-अलग कंपनियों के कीटनाशक उत्पाद बिना आवश्यक प्रिंसिपल सर्टिफिकेट के भंडारित पाए गए।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने बालाजी कृषि केन्द्र को नोटिस जारी कर पूरे मामले में कारण बताने को कहा है। इसके साथ ही वहां कीटनाशक उपलब्ध कराने वाली 34 कंपनियों को भी नोटिस जारी किया गया है।

संबंधित कंपनियों और प्रतिष्ठान को अपना जवाब 2 सितंबर 2026 तक प्रस्तुत करना होगा।

20 अगस्त को हुआ था निरीक्षण

कृषि विभाग की यह कार्रवाई 20 अगस्त 2026 को किए गए संयुक्त निरीक्षण के बाद सामने आई। राज्य और जिला स्तर की संयुक्त निरीक्षण टीम ने नवागढ़ स्थित बालाजी कृषि केन्द्र का निरीक्षण किया था।

निरीक्षण के दौरान कीटनाशक उत्पादों के भंडारण और उनसे संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच की गई। इसी दौरान अलग-अलग कंपनियों के उत्पाद बिना प्रिंसिपल सर्टिफिकेट के भंडारित पाए गए।

विभाग ने इस मामले को कीटनाशी अधिनियम, 1968 तथा कीटनाशी नियम, 1971 के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ा माना है।

34 कंपनियों को भी नोटिस

इस कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि जांच की आंच केवल बालाजी कृषि केन्द्र तक सीमित नहीं रही। वहां उपलब्ध मिले कीटनाशक उत्पादों से जुड़ी कंपनियों को भी नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा गया है।

नोटिस पाने वाली कंपनियों में कृषि-रसायन और कीटनाशक क्षेत्र की कई जानी-मानी कंपनियां शामिल हैं।

प्रमुख नामों में शामिल हैं:

  • मेसर्स पीआई इंडस्ट्रीज लिमिटेड
  • मेसर्स आईपीएल ओवरसीज
  • मेसर्स कॉर्टेवा एग्रीसाइंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स बीएएसएफ इंडिया लिमिटेड
  • गायत्री इंसेक्टिसाइड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स बायरा क्रॉप साइंस लिमिटेड
  • मेसर्स स्वाल कॉर्पोरेशन लिमिटेड
  • मेसर्स सिनजेंटा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स रालिस इंडिया लिमिटेड
  • मेसर्स अतुल लिमिटेड
  • मेसर्स धर्माज क्रॉप गार्ड लिमिटेड
  • मेसर्स एमबीएफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स सेफेक्स केमिकल्स इंडिया लिमिटेड
  • मेसर्स इंसेक्टिसाइड्स (इंडिया) लिमिटेड
  • मेसर्स नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड
  • मेसर्स अनु प्रोडक्ट्स लिमिटेड
  • मेसर्स जीएसपी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स ट्रॉपिकल एग्रो सिस्टम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स इंडो स्विस केमिकल्स लिमिटेड
  • मेसर्स क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड
  • मेसर्स मेधनी एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स विलोवुड केमिकल्स लिमिटेड
  • मेसर्स निचिनो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स केमिनोवा इंडिया लिमिटेड
  • मेसर्स श्रीराम बायोकैम कॉर्पोरेशन
  • मेसर्स जय सी लाइफ साइंसेज
  • मेसर्स भगवती ओवरसीज
  • मेसर्स सरस्वती एग्रो केमिकल्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड
  • मेसर्स जीवाग्रो लिमिटेड
  • मेसर्स एचपीएम केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड
  • मेसर्स आईपीएल बायोलॉजिकल लिमिटेड
  • मेसर्स ब्लू चिप मार्केटिंग कंपनी

इसके अलावा बिलासपुर की मेसर्स आलोक एग्रो केमिकल्स, राजनांदगांव की मेसर्स खंडेलवाल पेस्टिसाइड्स प्राइवेट लिमिटेड और तेलंगाना की मेसर्स श्रीकर बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम भी कार्रवाई से जुड़े हैं।

लॉजिस्टिक्स और ट्रेडिंग फर्मों पर भी नजर

जारी किए गए विवरण में कुछ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और ट्रेडिंग से जुड़े प्रतिष्ठानों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें श्री वासु लॉजिस्टिक्स लिमिटेड, मानव वेयरहाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड, गणेश ट्रेडिंग कंपनी, आशा एंटरप्राइजेज, दिनेश एग्रो और एस.एल. लॉजिस्टिक्स कंपनी शामिल हैं।

इससे यह मामला केवल उत्पादों के भंडारण तक सीमित न रहकर उनकी आपूर्ति और वितरण व्यवस्था से भी जुड़ता दिखाई देता है।

2 सितंबर तक देना होगा जवाब

कृषि विभाग ने संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है। सभी संबंधित कंपनियों और बालाजी कृषि केन्द्र को 2 सितंबर 2026 तक जवाब देना होगा।

जवाब और संबंधित दस्तावेज मिलने के बाद विभाग मामले की समीक्षा करेगा। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और नियमों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।

किसानों के लिए क्यों अहम है यह मामला?

कीटनाशकों का इस्तेमाल सीधे खेती और फसलों से जुड़ा होता है। ऐसे में इनके भंडारण और वितरण से संबंधित नियमों का पालन महत्वपूर्ण है।

प्रमाणन से जुड़े नियमों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की वैधता और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। इसलिए विभाग की ओर से की गई ऐसी जांच किसानों और कृषि बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फिलहाल इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 2 सितंबर 2026 है। इसी तारीख तक संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद कृषि विभाग की आगे की कार्रवाई तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।