August 12, 2026

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गुड़, खजूर या सफेद चीनी… आखिर कौन है बेहतर? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया मीठे का पूरा सच

गुड़

मीठा खाने की इच्छा हो और सेहत भी बनी रहे, इसके लिए आजकल कई लोग सफेद चीनी की जगह गुड़, खजूर, नारियल चीनी और दूसरे नेचुरल स्वीटनर्स का इस्तेमाल करने लगे हैं। आम धारणा है कि नेचुरल चीजों से मिलने वाली मिठास सफेद चीनी की तुलना में ज्यादा हेल्दी होती है और इससे वजन बढ़ने या ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा भी कम हो सकता है।

लेकिन क्या सच में ऐसा है?

न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. रोहिणी पाटिल के अनुसार, सिर्फ सफेद चीनी को किसी दूसरे मीठे विकल्प से बदल देने से आपकी डाइट अपने आप हेल्दी नहीं हो जाती। गुड़, खजूर और नारियल चीनी में भी शुगर और कैलोरी होती हैं। इसलिए सबसे ज्यादा मायने रखता है कि आप कितना मीठा और कितनी बार खा रहे हैं।

क्या कॉफी में चीनी की जगह खजूर इस्तेमाल कर सकते हैं?

हां, कॉफी में मिठास के लिए खजूर का इस्तेमाल किया जा सकता है। खजूर प्राकृतिक रूप से मीठे होते हैं और इनमें फाइबर के साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम और कुछ एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं।

खासकर मेडजूल खजूर नरम और काफी मीठे होते हैं। इसलिए थोड़ी मात्रा में इस्तेमाल करने पर भी कॉफी में अच्छी मिठास आ सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि खजूर को जितनी मात्रा में चाहें उतना खाया जा सकता है। इसमें भी प्राकृतिक शुगर और कैलोरी मौजूद होती है।

गर्म चाय-कॉफी में आर्टिफिशियल स्वीटनर डालना सही?

आर्टिफिशियल स्वीटनर्स को लेकर भी लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। हर स्वीटनर गर्मी के संपर्क में आने पर एक जैसा व्यवहार नहीं करता।

कुछ स्वीटनर्स गर्म पेय पदार्थों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन उनकी हीट स्टेबिलिटी अलग-अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, सुक्रालोज सामान्य परिस्थितियों में गर्मी को काफी हद तक सहन कर सकता है, लेकिन बहुत अधिक तापमान पर बदलाव संभव हैं।

इसलिए अगर आप किसी स्वीटनर को चाय, कॉफी या बेकिंग में इस्तेमाल कर रहे हैं तो पैकेट पर दिए निर्देशों को पढ़ना बेहतर है।

पैकेट वाले खाने में छिपी चीनी कैसे पहचानें?

कई बार किसी पैकेज्ड फूड के सामने ‘लो शुगर’ या ‘नेचुरल’ जैसे शब्द लिखे होते हैं। ऐसे में केवल फ्रंट लेबल देखकर फैसला करना सही नहीं है।

खरीदारी करते समय पीछे दिए गए Ingredients यानी सामग्री की सूची जरूर देखें। चीनी कई अलग-अलग नामों से मौजूद हो सकती है।

इन नामों पर ध्यान दें:

  • सुक्रोज
  • ग्लूकोज
  • फ्रुक्टोज
  • डेक्सट्रोज
  • माल्टोज
  • कॉर्न सिरप
  • राइस सिरप
  • माल्ट सिरप
  • शहद
  • गुड़
  • फलों का रस या फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट

इसलिए किसी प्रोडक्ट को सिर्फ इसलिए हेल्दी न मानें क्योंकि उसमें सीधे तौर पर ‘चीनी’ शब्द नहीं लिखा है।

क्या गुड़ या कोकोनट शुगर से डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है?

यह सबसे आम गलतफहमियों में से एक है। सफेद चीनी की जगह गुड़ या कोकोनट शुगर इस्तेमाल करने से डायबिटीज का खतरा अपने आप खत्म या बहुत कम नहीं हो जाता।

गुड़ में कुछ खनिज तत्व मौजूद हो सकते हैं, लेकिन इसमें भी पर्याप्त मात्रा में शुगर और कैलोरी होती है। इसी तरह कोकोनट शुगर को भी बिना मात्रा की चिंता किए इस्तेमाल करना सही नहीं है।

यानी ‘नेचुरल’ का मतलब यह नहीं कि आप इसे असीमित मात्रा में खा सकते हैं।

फिर खाने में मिठास कैसे बढ़ाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार, हर चीज में चीनी का विकल्प खोजने के बजाय धीरे-धीरे मीठा खाने की आदत कम करना ज्यादा बेहतर तरीका हो सकता है।

अगर किसी डिश में हल्की प्राकृतिक मिठास चाहिए तो इन चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है:

  • केला
  • सेब
  • बेरीज
  • पका हुआ आम
  • खजूर

फलों से मिठास के साथ फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं।

चाय या कॉफी में बिना अतिरिक्त चीनी के स्वाद बढ़ाने के लिए इलायची, वनीला या बिना चीनी वाला कोको इस्तेमाल किया जा सकता है। कम कैलोरी वाला विकल्प तलाश रहे लोग स्टीविया का सीमित मात्रा में उपयोग कर सकते हैं।

गुड़ को लेकर सबसे जरूरी बात

गुड़ को सफेद चीनी से बेहतर विकल्प मानकर जरूरत से ज्यादा खाना सही नहीं है। यही बात खजूर, शहद और कोकोनट शुगर पर भी लागू होती है।

अगर आपकी रोज की चाय या कॉफी में कई चम्मच चीनी जाती है, तो अचानक पूरी तरह बंद करने के बजाय धीरे-धीरे मात्रा कम करना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है।

याद रखें

  • मीठा चाहे चीनी से आए या गुड़ से, मात्रा महत्वपूर्ण है।
  • खजूर में शुगर के साथ कुछ फाइबर और पोषक तत्व भी होते हैं, लेकिन यह भी कैलोरी वाला खाद्य है।
  • गुड़ को ‘शुगर-फ्री’ विकल्प समझना गलत है।
  • पैकेज्ड फूड खरीदते समय Ingredients List जरूर पढ़ें।
  • धीरे-धीरे मीठे की आदत कम करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

नोट: यह जानकारी सामान्य पोषण संबंधी जागरूकता के लिए है। डायबिटीज, वजन या किसी अन्य विशेष स्वास्थ्य स्थिति में डाइट में बदलाव करने से पहले योग्य डॉक्टर या रजिस्टर्ड न्यूट्रिशनिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर है।