September 5, 2026

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Jashpur News: भैरव पहाड़ को मिलेगा नया रूप, जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के संरक्षण पर जोर; पर्यावरण वाटिका भी बनेगी खास

रायपुर/जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन एवं पर्यावरण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में पहल तेज हो गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय ने जशपुर प्रवास के दौरान भैरव पहाड़ और पर्यावरण वाटिका का निरीक्षण किया।

उन्होंने दोनों स्थलों की मौजूदा स्थिति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को विकास कार्यों में प्राकृतिक स्वरूप, पर्यावरण संतुलन और स्थानीय जनजातीय संस्कृति को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

भैरव पहाड़ का किया निरीक्षण

वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय ने मनोरा विकासखंड स्थित भैरव पहाड़ का भ्रमण किया। उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता के साथ इसके धार्मिक महत्व और स्थानीय जनजातीय परंपराओं के बारे में जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भैरव पहाड़ का विकास उसकी प्राकृतिक पहचान को बनाए रखते हुए किया जाना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि विकास कार्यों में:

  • स्थानीय जनजातीय परंपराओं का संरक्षण हो।
  • क्षेत्र का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित न हो।
  • पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जाए।
  • स्थानीय धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाए।
  • पर्यटन विकास प्रकृति आधारित मॉडल पर हो।

भैरव पहाड़ को सोगड़ा आश्रम से जुड़ी आस्था, प्रकृति और जनजातीय संस्कृति के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

पर्यावरण वाटिका को बनाया जाएगा प्रकृति शिक्षा का केंद्र

इसके बाद वन बल प्रमुख ने कांसाबेल वन परिक्षेत्र के ग्राम बगिया में स्थित पर्यावरण वाटिका का निरीक्षण किया।

उन्होंने यहां पौधरोपण, हरित क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पर्यावरण वाटिका को केवल हरित क्षेत्र तक सीमित न रखते हुए इसे लोगों के लिए प्रकृति और पर्यावरण को समझने का प्रभावी केंद्र बनाया जाए।

इन गतिविधियों पर रहेगा जोर

  • स्थानीय प्रजातियों के पौधों का संरक्षण।
  • पौधों की बेहतर देखभाल और रखरखाव।
  • विद्यार्थियों के लिए प्रकृति शिक्षा कार्यक्रम।
  • स्थानीय समुदाय की भागीदारी।
  • पर्यावरण जागरूकता अभियान।
  • हरित क्षेत्र का विस्तार।

इससे विद्यार्थियों और आम नागरिकों को स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में मदद मिलेगी।

प्रकृति और संस्कृति दोनों का संरक्षण जरूरी

वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय ने कहा कि जशपुर की पहचान केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां की जैव विविधता, जनजातीय संस्कृति और धार्मिक आस्था भी जिले की विशिष्ट पहचान का हिस्सा हैं।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों के विकास के दौरान स्थानीय परंपराओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

उनका जोर ऐसे विकास मॉडल पर रहा जिसमें पर्यटन बढ़े, लेकिन इसके साथ पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति भी सुरक्षित रहे।

हनुमान टेकरी समेत अन्य स्थलों के विकास पर भी जोर

वन बल प्रमुख ने भैरव पहाड़, हनुमान टेकरी और पर्यावरण वाटिका जैसे स्थलों के विकास को प्रकृति आधारित और पर्यावरण अनुकूल तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने जनभागीदारी को भी ऐसे विकास कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने से उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

पर्यटन के साथ रोजगार के अवसर

यदि इन स्थलों का विकास पर्यावरण अनुकूल तरीके से किया जाता है तो स्थानीय युवाओं और समुदायों के लिए कई तरह के अवसर पैदा हो सकते हैं। इनमें स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पाद, खानपान और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े काम शामिल हो सकते हैं।

इससे जशपुर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने वन बल प्रमुख को विभिन्न स्थलों की वर्तमान स्थिति और विकास की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मौके पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए और संरक्षण एवं विकास कार्यों में पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

इस अवसर पर सरगुजा वृत्त के मुख्य वन संरक्षक दिलराज प्रभाकर, वनमंडलाधिकारी बलरामपुर आलोक वाजपेयी, वनमंडलाधिकारी जशपुर शशि कुमार सहित जशपुर वनमंडल के उपवनमंडलाधिकारी, वन परिक्षेत्राधिकारी और वन विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

जशपुर के भैरव पहाड़ और पर्यावरण वाटिका के विकास को लेकर दिए गए निर्देशों से साफ है कि जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ प्रकृति, जनजातीय विरासत और स्थानीय आस्था के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह मॉडल आने वाले समय में स्थानीय समुदाय को विकास से जोड़ने और जशपुर की पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मददगार हो सकता है।