August 5, 2026

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FSSAI का बड़ा एक्शन! डाबर के शहद, घी, तेल समेत कई प्रोडक्ट्स की बिक्री और प्रचार पर रोक, जानिए पूरा मामला

देश की प्रमुख FMCG कंपनियों में शामिल डाबर इंडिया (Dabur India) को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से बड़ा झटका लगने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के कई खाद्य उत्पादों पर लगाए गए दावों को लेकर नियामक ने कड़ी आपत्ति जताई है। बताया जा रहा है कि कंपनी को कुछ उत्पादों की बिक्री और प्रचार रोकने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि उनकी पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए गए दावे खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए।

यदि यह कार्रवाई अंतिम रूप से लागू रहती है, तो इसका असर कंपनी के कई लोकप्रिय उत्पादों पर पड़ सकता है, जिनका इस्तेमाल देशभर के लाखों उपभोक्ता करते हैं।

किन उत्पादों पर उठे सवाल?

रिपोर्ट के मुताबिक जिन उत्पादों को लेकर कार्रवाई की गई है, उनमें शामिल हैं—

  • शहद (Honey)
  • देसी घी
  • तिल का तेल
  • वर्जिन नारियल तेल
  • एप्पल साइडर विनेगर
  • नारियल पानी
  • नारियल दूध (Coconut Milk)

इन उत्पादों के प्रचार और पैकेजिंग में किए गए कुछ दावों को FSSAI ने नियमों के विपरीत माना है।

‘100% शुद्ध’ और ‘100% प्राकृतिक’ जैसे दावे बने वजह

बताया गया है कि कंपनी अपने कुछ उत्पादों पर—

  • 100% Natural
  • 100% Pure
  • 100% Purity Guaranteed
  • 100% Organic

जैसे दावों का उपयोग कर रही थी।

FSSAI के विज्ञापन एवं दावा विनियम, 2018 के अनुसार, ऐसे दावों के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक आधार और नियामकीय मानकों का पालन आवश्यक होता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो इन्हें उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला माना जा सकता है।

ऑर्गेनिक लोगो के इस्तेमाल पर भी सवाल

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ उत्पादों पर ‘ऑर्गेनिक’ संबंधी लोगो का उपयोग आवश्यक स्वीकृति के बिना किया गया था। इसी वजह से नियामक ने लेबलिंग और ब्रांडिंग संबंधी नियमों के उल्लंघन पर भी आपत्ति दर्ज की है।

पहले भी जारी हुआ था नोटिस

जानकारी के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब कंपनी को इस संबंध में नोटिस मिला हो। बताया जा रहा है कि पहले भी सुधार के निर्देश दिए गए थे, लेकिन नियामक को कंपनी की कार्रवाई संतोषजनक नहीं लगी। इसके बाद सख्त कदम उठाए गए।

कंपनी को क्या करना होगा?

रिपोर्ट के अनुसार FSSAI ने कंपनी से निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करने को कहा है।

संभावना है कि कंपनी को—

  • पैकेजिंग में बदलाव करना होगा।
  • विज्ञापनों से विवादित दावे हटाने होंगे।
  • लेबलिंग को FSSAI के नियमों के अनुरूप बनाना होगा।
  • भविष्य में प्रमाणित दावों का ही उपयोग करना होगा।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदने से पहले उसके लेबल, सामग्री (Ingredients) और प्रमाणन (Certification) को ध्यान से पढ़ना चाहिए। केवल विज्ञापनों में किए गए दावों के आधार पर किसी उत्पाद की गुणवत्ता का आकलन नहीं करना चाहिए।

महत्वपूर्ण बात

इस कार्रवाई का आधार फिलहाल उत्पादों की गुणवत्ता नहीं, बल्कि विज्ञापन और लेबलिंग संबंधी कथित नियम उल्लंघन बताया जा रहा है। यदि कंपनी आवश्यक सुधार करती है और नियामकीय शर्तों का पालन करती है, तो आगे की स्थिति बदल सकती है।

FSSAI द्वारा की गई ऐसी कार्रवाई यह संदेश देती है कि खाद्य उत्पादों के प्रचार में किए जाने वाले दावे पारदर्शी, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और उपभोक्ताओं को भ्रमित न करने वाले होने चाहिए। इससे उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने और खाद्य बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलती है।