August 6, 2026

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CGPSC पेपर लीक केस में पूर्व सचिव को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, कोर्ट बोला- ‘पेपर लीक हत्या से भी बड़ा अपराध’

CGPSC पेपर लीक केस: पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव की जमानत खारिज, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ने बढ़ाई मुश्किलें

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2021 के बहुचर्चित CGPSC पेपर लीक और भर्ती घोटाले में गिरफ्तार आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली। उच्च न्यायालय ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले को बेहद गंभीर बताया और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक को समाज के लिए अत्यंत घातक अपराध माना।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे कृत्य लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता तथा जनविश्वास को गहरा नुकसान पहुंचाते हैं।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का प्रश्नपत्र लीक करना सामान्य अपराध नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि—

  • पेपर लीक से लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत प्रभावित होती है।
  • ऐसे मामलों से पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
  • समाज और संस्थाओं में लोगों का भरोसा कमजोर होता है।
  • यह अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है।

अदालत ने टिप्पणी की कि “बाड़ ही खेत को खाने लगे” जैसी स्थिति तब पैदा होती है, जब गोपनीयता की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही नियमों का उल्लंघन करने के आरोपी हों।

क्या हैं आरोप?

सीबीआई की जांच के अनुसार वर्ष 2020 से 2022 के दौरान जब CGPSC राज्य सेवा परीक्षा आयोजित की जा रही थी, उस समय जीवन किशोर ध्रुव आयोग के सचिव थे।

जांच एजेंसी का आरोप है कि—

  • उन्होंने मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव को उपलब्ध कराए।
  • गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग किया गया।
  • प्रश्नपत्र के आधार पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

छापेमारी में क्या मिला?

सीबीआई द्वारा भिलाई स्थित आवास पर की गई तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले।

जांच में सामने आया कि—

  • सामान्य अध्ययन (पेपर-7) से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए।
  • निबंध (पेपर-2) की प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका की प्रतियां मिलीं।
  • पेपर-7 के 47 प्रश्नों में से 42 प्रश्न बरामद दस्तावेजों से मेल खाते पाए गए।

इन्हीं साक्ष्यों को जांच में महत्वपूर्ण माना गया।

बेटे के चयन पर भी सवाल

जांच एजेंसी का दावा है कि प्रश्नपत्र लीक से जुड़े कथित लाभ के आधार पर आरोपी के बेटे सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ।

हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि—

  • जीवन किशोर ध्रुव ने पहले ही आयोग को अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी दे दी थी।
  • उन्हें गोपनीय कार्यों से अलग रखा गया था।
  • वे 18 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं।
  • समान परिस्थितियों वाले अन्य आरोपियों को राहत मिलने के आधार पर उन्हें भी जमानत दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?

हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने माना कि—

  • आरोपी एक वरिष्ठ लोकसेवक और आयोग के सचिव रहे हैं।
  • उनके पद की जिम्मेदारी अत्यंत संवेदनशील थी।
  • सीबीआई द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, बरामदगी और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया उनकी भूमिका की ओर संकेत करते हैं।
  • भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इन्हीं कारणों से अदालत ने नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।

युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला

CGPSC पेपर लीक मामला छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित भर्ती अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है। इस मामले में हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत, सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और आयोग की विश्वसनीयता जैसे गंभीर प्रश्न जुड़े हुए हैं।

हाईकोर्ट की यह टिप्पणी स्पष्ट संकेत देती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों को न्यायपालिका अत्यंत गंभीरता से देख रही है। ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई का मार्ग और अधिक मजबूत होता है।

नोट: यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।