रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। मामले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद अब उसका कथित फर्जी पासपोर्ट सामने आया है। इस दस्तावेज में तस्वीर सौरभ चंद्राकर की बताई जा रही है, लेकिन नाम श्रीलंकाई क्रिकेटर अजंता मेंडिस के नाम पर दर्ज होने का दावा किया जा रहा है।
जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या सौरभ चंद्राकर ने कानूनी कार्रवाई और प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बचने के लिए फर्जी पहचान का सहारा लिया था।
फर्जी पासपोर्ट से ओमान पहुंचने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर ने कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया था।
वायरल दस्तावेज को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक—
पासपोर्ट नंबर E3387986 बताया जा रहा है।
इसमें अलग पहचान दर्ज होने की बात कही गई है।
जन्मतिथि भी सौरभ चंद्राकर के वास्तविक रिकॉर्ड से अलग बताई जा रही है।
दस्तावेज की वैधता वर्ष 2034 तक बताई गई है।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
अलग-अलग दस्तावेजों में अलग पहचान
जांच में यह भी सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल से जुड़े दस्तावेजों में अलग-अलग पहचान और जन्मतिथि दर्ज होने की बात सामने आई है।
एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि—
फर्जी दस्तावेज किस नेटवर्क के जरिए तैयार किए गए?
इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे?
क्या यह पहचान छिपाने की सोची-समझी योजना थी?
जांच एजेंसियों को आशंका है कि अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए किया गया हो सकता है।
महादेव ऐप मामले में पहले से जांच जारी
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियां कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं।
एजेंसियों का आरोप है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के जरिए बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियां संचालित की गईं।
रेड नोटिस हटाने की मांग भी हुई थी खारिज
सौरभ चंद्राकर ने अपने खिलाफ जारी इंटरपोल रेड नोटिस को हटाने की मांग की थी। उसने दावा किया था कि भारत में उसके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है।
लेकिन इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
CCF के अनुसार, मामला कथित वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, इसलिए रेड नोटिस जारी रखने का निर्णय लिया गया।
फर्जी पासपोर्ट इस्तेमाल करना गंभीर अपराध
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दूसरे देश में प्रवेश करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
ओमान के कानूनों के तहत फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल पर—
जेल की सजा,
आर्थिक जुर्माना,
अन्य कानूनी कार्रवाई
का प्रावधान हो सकता है।
UAE से भारत लाने की कोशिश पहले भी हुई
बताया जाता है कि सौरभ चंद्राकर लंबे समय से जांच एजेंसियों की नजर में था। साल 2024 में दुबई में उसे कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था।
भारत की ओर से उसके प्रत्यर्पण के प्रयास किए गए थे, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
अब ओमान में गिरफ्तारी के बाद भारतीय एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण और आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा में काम कर रही हैं।
जांच एजेंसियां खंगाल रही पूरा नेटवर्क
फर्जी पासपोर्ट सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सौरभ चंद्राकर को फर्जी पहचान दिलाने में किस-किस व्यक्ति या गिरोह की भूमिका रही।
महादेव ऐप मामले में अब फर्जी दस्तावेज, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन से जुड़े नए पहलुओं की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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