July 27, 2026

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आत्मनिर्भर नारी से बदल रहा छत्तीसगढ़! महिलाओं के लिए सरकार की बड़ी योजनाओं ने लिखी विकास की नई इबारत

रायपुर। किसी भी राज्य की प्रगति का सबसे बड़ा पैमाना वहां की महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी होती है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार मजबूत होता है, समाज आगे बढ़ता है और विकास को नई गति मिलती है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश की लाखों महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

महतारी वंदन योजना बनी आर्थिक संबल

राज्य सरकार की सबसे चर्चित योजनाओं में शामिल महतारी वंदन योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का मजबूत आधार बन चुकी है।

योजना की प्रमुख उपलब्धियां:

  • 66 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता।
  • अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18,805 करोड़ रुपये से अधिक सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित।
  • वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान।

इस नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं घरेलू जरूरतों के साथ छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।

बेटियों के भविष्य के लिए नई पहल

राज्य सरकार बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी नई योजनाएं शुरू कर रही है।

मुख्य योजनाएं:

  • रानी दुर्गावती योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर पात्र बालिका को 1.50 लाख रुपये की सहायता।
  • योजना के लिए 15 करोड़ रुपये का बजट।
  • प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये
  • मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान।

पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस

महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

मुख्य प्रावधान:

  • आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये
  • पूरक पोषण आहार हेतु 650 करोड़ रुपये
  • कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये
  • 750 नए आंगनबाड़ी केंद्रों (250 शहरी और 500 ग्रामीण) के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये

महिला सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था

सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

महत्वपूर्ण पहल:

  • प्रदेश के 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित।
  • घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर कानूनी, चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता।
  • महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 से त्वरित सहायता।
  • सखी वन-स्टॉप सेंटरों के लिए डिजिटल एसओपी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना छत्तीसगढ़।

महतारी सदन से मिल रही नई पहचान

महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रदेश में महतारी सदन बनाए जा रहे हैं।

अब तक की स्थिति:

  • 368 महतारी सदन स्वीकृत।
  • 137 महतारी सदनों का निर्माण पूरा।
  • वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान।

स्वयं सहायता समूहों की बढ़ती ताकत

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

बिहान मिशन के प्रमुख आंकड़े:

  • 2.92 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित।
  • 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ीं।
  • 10.43 लाख से अधिक लखपति दीदी तैयार।

महिलाएं अब कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, रेडी-टू-ईट, हस्तशिल्प और अन्य उद्यमों के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।

महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आर्थिक सहायता

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना।
  • मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना।
  • दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना।
  • मिनीमाता महतारी जतन योजना।
  • महतारी शक्ति ऋण योजना के तहत 25 हजार रुपये तक बिना जमानत ऋण
  • महिला समृद्धि योजना के तहत 42,878 समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण

शिक्षा और सम्मान को भी बढ़ावा

सरकार छात्राओं और महिलाओं की शिक्षा व सम्मान पर भी विशेष ध्यान दे रही है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • सुशिक्षा योजना के तहत 2.18 लाख से अधिक छात्राओं को हर महीने 500 रुपये
  • शुचिता योजना के तहत 2,000 विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें।
  • मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 24 हजार से अधिक बेटियों का सामूहिक विवाह और प्रत्येक जोड़े को 50 हजार रुपये की सहायता।

स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पाद अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहे हैं।

प्रमुख उदाहरण:

  • जशप्योर ब्रांड।
  • वोकल फॉर लोकल अभियान।
  • सखी साड़ी और मिलेट कैफे जैसी पहलें।

इन प्रयासों से महिलाओं की आय बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिल रही है।