July 26, 2026

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महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं की ताकत! बस्तर की पारंपरिक ‘तुपकी’ से बढ़ी कमाई, गोंचा पर्व में दिखेगा नया रंग

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना का सकारात्मक असर अब बस्तर की पारंपरिक कला और संस्कृति पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जगदलपुर विकासखंड के ग्राम मांझीगुड़ा की रहने वाली श्रीमती चंदा ने योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग गोंचा पर्व में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक तुपकी बनाने में किया है। इससे उनके परिवार की आय बढ़ने की उम्मीद है और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

आर्थिक सहायता बनी आत्मनिर्भरता की नींव

महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली राशि ने चंदा को आर्थिक रूप से आत्मविश्वासी बनाया। उन्होंने इसी सहायता से तुपकी निर्माण के लिए बांस और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी। अब पूरा परिवार मिलकर तुपकी तैयार कर रहा है, जिससे गोंचा पर्व के दौरान अच्छी आमदनी की संभावना है।

चंदा का कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को अपने पारंपरिक कौशल को रोजगार में बदलने का अवसर भी दे रही है।

क्या है तुपकी और क्यों है खास?

बस्तर का प्रसिद्ध गोंचा पर्व धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम है। इस पर्व में इस्तेमाल होने वाली तुपकी बांस से बनाई जाती है और इसमें मलाग्नी वृक्ष के बीज (पेंगू) का उपयोग कर बंदूक जैसी आवाज उत्पन्न की जाती है।

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान श्रद्धालु इसी तुपकी से पारंपरिक सलामी देते हैं। यह परंपरा वर्षों से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है और आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है।

गोंचा पर्व से बढ़ती है स्थानीय आजीविका

गोंचा पर्व के दौरान तुपकी की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में इसका निर्माण करने वाले परिवारों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।

इस पहल से कई फायदे हो रहे हैं:

  • महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिल रहा है।
  • परिवार की आय में वृद्धि हो रही है।
  • पारंपरिक हस्तकला को नया बाजार मिल रहा है।
  • बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हो रहा है।
  • नई पीढ़ी पारंपरिक कला से जुड़ रही है।

महिलाओं को मिल रही नई पहचान

चंदा बताती हैं कि पहले सीमित संसाधनों के कारण बड़े पैमाने पर तुपकी बनाना संभव नहीं था, लेकिन अब योजना से मिलने वाली नियमित राशि ने उनकी आर्थिक चिंता कम कर दी है। इससे वे आत्मविश्वास के साथ अपना पारंपरिक कार्य आगे बढ़ा रही हैं।

उनके अनुसार, यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपनी कला और संस्कृति को जीवित रखने का भी अवसर प्रदान कर रही है।

सरकार की प्राथमिकता में महिला सशक्तिकरण

राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18,805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में भी इस योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।

योजना से मिल रहे प्रमुख लाभ

  • हर महीने नियमित आर्थिक सहायता।
  • महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का विकास।
  • पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती।
  • बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में योगदान।