July 26, 2026

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तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात! 10,160 हितग्राहियों के खातों में पहुंचे 1.39 करोड़ रुपये से ज्यादा का बोनस

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने वनवासी परिवारों और तेन्दूपत्ता संग्राहकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) की राशि अब सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी गई है। इस पहल के तहत 10,160 संग्राहकों को 1 करोड़ 39 लाख 36 हजार 718 रुपये से अधिक की राशि डिजिटल माध्यम से भेजी गई।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी है और लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिए या देरी के सीधे आर्थिक सहायता मिल रही है।

10 हजार से अधिक वनवासी परिवारों को मिला सीधा लाभ

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल अंतर्गत पेण्ड्रारोड जिला लघु वनोपज सहकारी संघ की 9 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से यह बोनस राशि वितरित की गई।

मुख्य आंकड़े

  • कुल लाभार्थी – 10,160
  • कुल बोनस राशि – ₹1,39,36,718
  • संग्रहण – 6593 मानक बोरा तेन्दूपत्ता
  • भुगतान प्रणाली – एमएफपी कलेक्शन एंड पेमेंट सिस्टम (DBT)

डिजिटल भुगतान के कारण पूरी राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंची।

डिजिटल भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता

राज्य सरकार ने बोनस वितरण के लिए डिजिटल व्यवस्था अपनाई, जिससे भुगतान प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी।

इस व्यवस्था के प्रमुख फायदे—

  • राशि सीधे बैंक खाते में पहुंची।
  • बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई।
  • भुगतान में देरी नहीं हुई।
  • लाभार्थियों को पूरी राशि सुरक्षित मिली।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई।

बोनस से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

वन विभाग के अनुसार यह अतिरिक्त राशि वनवासी परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक सहायता साबित होगी। लाभार्थी इस धन का उपयोग अपनी आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में कर सकेंगे।

बोनस राशि का उपयोग इन कार्यों में किया जा सकेगा—

  • खेती और कृषि कार्य
  • बच्चों की शिक्षा
  • स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें
  • घरेलू खर्च
  • छोटे व्यवसाय और आजीविका के साधन

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

पहले ही मिल चुका था संग्रहण का पारिश्रमिक

सरकार ने बताया कि वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए 4,000 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से पारिश्रमिक पहले ही दिया जा चुका था। अब प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) मिलने से संग्राहकों की आय में अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई है।

यह कदम वनवासी समुदाय को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

वनवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत

मरवाही वनमंडल की ओर से संचालित इस अभियान के तहत हजारों परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता मिली है। इससे ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध और डिजिटल भुगतान प्रणाली से लाभार्थियों का सरकारी योजनाओं पर भरोसा भी मजबूत होता है।