July 28, 2026

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भगवान जगन्नाथ के नवयौवन दर्शन 14 जुलाई को, 16 जुलाई से निकलेगी भव्य रथयात्रा; जानें पूरा कार्यक्रम

भगवान जगन्नाथ के भक्तों का इंतजार अब समाप्त होने जा रहा है। 15 दिनों के अनासर काल (एकांतवास) और विशेष औषधीय उपचार के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा 14 जुलाई को अपने नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवयौवन दर्शन अत्यंत शुभ, मंगलकारी और पुण्यदायी माने जाते हैं।

इसके बाद 16 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के अवसर पर भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

14 जुलाई को होंगे नवयौवन दर्शन

अनासर काल के दौरान भगवान विश्राम करते हैं और मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं। इस अवधि के बाद भगवान नए और तेजस्वी स्वरूप में दर्शन देते हैं, जिसे नवयौवन दर्शन कहा जाता है।

नवयौवन दर्शन का कार्यक्रम

  • सुबह मंगला आरती के साथ दर्शन शुरू होंगे।
  • भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
  • भगवान श्वेत वस्त्र धारण करेंगे।
  • विशेष पुष्पों से अलंकरण किया जाएगा।
  • श्रद्धालु शयन आरती तक दर्शन कर सकेंगे।

मंदिर परिसर को फूलों और आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया जा रहा है, जिससे पूरे वातावरण में उत्सव का माहौल रहेगा।

भगवान को लगेगा विशेष भोग

नवयौवन दर्शन के दिन भगवान को पारंपरिक व्यंजनों का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।

भोग में शामिल प्रमुख प्रसाद

  • परवल की मिठाई
  • परवल का जूस
  • अन्य पारंपरिक व्यंजन

भक्तों का विश्वास है कि इस दिन भगवान को अर्पित भोग अत्यंत शुभ माना जाता है।

नेत्र उत्सव और प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम

14 जुलाई को भगवान को अंतःगृह से बाहर लाया जाएगा और विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

मुख्य कार्यक्रम

  • दोपहर 12 बजे से नेत्र उत्सव प्रारंभ।
  • दोपहर 3 बजे तक नेत्र उत्सव।
  • इसके बाद प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान।
  • शाम को विशेष आरती।

इन अनुष्ठानों के बाद रथयात्रा की तैयारियां अंतिम रूप ले लेंगी।

16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा

आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और भगवान सुदर्शन अपने सिंहासन से उतरकर विशाल रथों पर विराजमान होंगे।

रथयात्रा के दौरान—

  • हजारों श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचेंगे।
  • पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन और जयघोष गूंजेगा।
  • भगवान नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में प्रवास करेंगे।
  • इसके बाद घूरती (बहुदा) रथयात्रा के माध्यम से मुख्य मंदिर में वापसी होगी।

अंतिम चरण में तैयारियां

रथयात्रा को भव्य बनाने के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं।

मुख्य तैयारियां

  • रथ को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है।
  • विशेष पीला कपड़ा ओडिशा से मंगाया गया है।
  • भगवान के वस्त्र पुरी से लाए गए हैं।
  • मंदिर और रथ की सजावट के लिए फूल कोलकाता से मंगाए गए हैं।
  • रथ पर भगवान विष्णु के दशावतारों का सुंदर चित्रण किया गया है, जिसमें वामन, नरसिंह और अन्य अवतार शामिल हैं।
  • लाल और पीले रंगों की सजावट रथ को भव्य स्वरूप दे रही है।

नवयौवन दर्शन का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनासर काल के बाद भगवान के नवयौवन स्वरूप के दर्शन करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यह अवसर भगवान के नए तेज, ऊर्जा और कृपा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन दर्शन के लिए पहुंचते हैं।