नाबालिग से दुष्कर्म
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला, गरियाबंद कोर्ट ने दोषी को सुनाई 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। पॉक्सो एवं बलात्कार प्रकरणों की विशेष अदालत ने आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर (21 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर कुल 23 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
न्यायालय ने यह फैसला पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाया। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को कठोर दंड दिया।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 19 मई 2025 की शाम की है। नाबालिग पीड़िता ने थाना इंदागांव में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अकेले नाले की ओर गई थी।
पीड़िता के आरोप के मुताबिक—
आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर ने उसे रोका।
गर्दन पर चाकू रखकर डराया।
मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
इसके बाद उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया।
घटना के बाद पीड़िता ने अपने परिवार को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पुलिस ने तत्काल की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना इंदागांव पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस जांच के बाद मामले में न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
विवेचना में शामिल अधिकारियों में—
उप पुलिस अधीक्षक गरिमा दादर
अनुविभागीय अधिकारी पुलिस विकास पाटले
उप निरीक्षक जितेन्द्र कुमार विजयवार
शामिल रहे।
अदालत में पेश किए गए 14 गवाह
अभियोजन पक्ष ने अपराध को साबित करने के लिए न्यायालय में कुल 14 साक्षियों के बयान दर्ज कराए।
मामले में न्यायालय ने—
पीड़िता के बयान
चिकित्सा रिपोर्ट
अन्य गवाहों के साक्ष्य
घटना से जुड़े तथ्यों
का परीक्षण किया।
सभी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया।
किन धाराओं में मिली सजा?
फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने आरोपी को अलग-अलग धाराओं में दंडित किया।
सजा का विवरण—
पॉक्सो एक्ट धारा 4(1) के तहत — 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड।
बीएनएस धारा 351(3) के तहत — 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड।
बीएनएस धारा 115(2) के तहत — 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 3 हजार रुपये अर्थदंड।
कुल मिलाकर आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 23 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
अपराध की गंभीरता को देखते हुए फैसला
न्यायालय ने मामले की गंभीरता और नाबालिग पीड़िता के साथ किए गए अपराध को ध्यान में रखते हुए कठोर सजा सुनाई।
पॉक्सो कानून के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मामलों में न्यायालय पीड़ितों को न्याय दिलाने और अपराधियों को सख्त संदेश देने के उद्देश्य से फैसले सुनाते हैं।
मुख्य बातें
गरियाबंद फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला।
नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर को सजा।
आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास।
न्यायालय ने लगाया 23 हजार रुपये का अर्थदंड।
पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं में दोष सिद्ध।
अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों के माध्यम से अपराध साबित किया।
गरियाबंद न्यायालय का यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों पर सख्त रुख को दर्शाता है। पुलिस और अभियोजन पक्ष की प्रभावी कार्रवाई के बाद मामले में दोष सिद्ध होने से पीड़िता को न्याय मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

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