आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने देश में ईसाई समुदाय और उनके प्रार्थना स्थलों पर कथित हमलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इन घटनाओं को धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संजय सिंह ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि देश के विभिन्न राज्यों में ईसाई समुदाय के लोगों और चर्चों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में सरकार की ओर से स्पष्ट और प्रभावी प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दे रही है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की अपील की है।
कई राज्यों की घटनाओं का किया उल्लेख
अपने पत्र में संजय सिंह ने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और दिल्ली सहित कई राज्यों का जिक्र किया। उनका दावा है कि इन राज्यों में ईसाई समुदाय के लोगों और चर्चों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि इन मामलों पर केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। उनके अनुसार, देश के हर नागरिक को बिना किसी भय के अपने धर्म का पालन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
AAP सांसद ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पीड़ितों पर ही धर्मांतरण के आरोप लगाकर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि धर्मांतरण विरोधी कानूनों का कथित रूप से दुरुपयोग कर निर्दोष पादरियों और श्रद्धालुओं को परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि ऐसे आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
प्रधानमंत्री से की ये प्रमुख मांगें
संजय सिंह ने अपने पत्र में केंद्र सरकार से कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- ईसाई समुदाय पर कथित हमलों की निष्पक्ष जांच।
- दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कानून के अनुसार कार्रवाई।
- पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा उपलब्ध कराना।
- धर्मांतरण विरोधी कानूनों के कथित दुरुपयोग की जांच।
- सभी नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
संविधान का दिया हवाला
अपने पत्र में संजय सिंह ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 26 का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रावधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करे और किसी भी धर्म के लोगों के साथ भेदभाव न हो।
केंद्र सरकार की ओर से नहीं आया आधिकारिक जवाब
समाचार लिखे जाने तक प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्र सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे मामलों में सरकार की प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
राजनीतिक बहस तेज
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। AAP ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया है, जबकि इस पर अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं का भी इंतजार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में सभी पक्षों के दावों की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।

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