July 28, 2026

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भारत-इंडोनेशिया रिश्तों में ऐतिहासिक छलांग! रक्षा, UPI, टेक्नोलॉजी और व्यापार समेत कई बड़े समझौतों पर लगी मुहर

भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, कृषि, प्रौद्योगिकी और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल समझौतों का दौर नहीं, बल्कि भारत और इंडोनेशिया की समग्र रणनीतिक साझेदारी का “सुनहरा अध्याय” है।

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2018 में शुरू हुई व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है।

रणनीतिक साझेदारी को मिली नई दिशा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास लगातार मजबूत हुआ है और अब यह सहयोग केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुका है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश आने वाले वर्षों में साझा विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर काम करेंगे।

किन-किन क्षेत्रों में हुए महत्वपूर्ण समझौते?

भारत और इंडोनेशिया के बीच कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

प्रमुख क्षेत्र—

  • रक्षा सहयोग
  • समुद्री सुरक्षा
  • आपदा प्रबंधन
  • औद्योगिक सहयोग
  • महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
  • इस्पात उद्योग
  • कृषि
  • स्वास्थ्य सेवाएं
  • प्रौद्योगिकी
  • शिक्षा
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान

इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाना है।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।

इस दिशा में दोनों देशों ने सहमति बनाई है कि—

  • रक्षा आदान-प्रदान को बढ़ाया जाएगा।
  • संयुक्त औद्योगिक सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • आपदा प्रबंधन में साझा प्रयास किए जाएंगे।
  • समुद्री क्षेत्र में समन्वय और सहयोग मजबूत होगा।

भारत की दवाएं होंगी अधिक सुलभ

प्रधानमंत्री ने बताया कि नए समझौतों के बाद भारत की गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाएं इंडोनेशिया के नागरिकों तक पहले की तुलना में अधिक आसानी से पहुंच सकेंगी।

इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।

महत्वपूर्ण खनिज और इस्पात क्षेत्र में नई साझेदारी

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों और इस्पात क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है।

इसके तहत—

  • सप्लाई चेन मजबूत की जाएगी।
  • दोनों देशों की कंपनियां संयुक्त रूप से कार्य करेंगी।
  • दुर्लभ खनिज और मैग्नेट उत्पादन में नई साझेदारी विकसित होगी।

UPI से मिलेगा व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा

प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI का इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली के साथ एकीकरण किया जाएगा।

इससे कई फायदे होंगे—

  • दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान आसान होगा।
  • व्यापारिक लेन-देन में सुविधा मिलेगी।
  • भारतीय और इंडोनेशियाई पर्यटकों को भुगतान में आसानी होगी।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

संस्कृति और शिक्षा में भी बढ़ेगा सहयोग

दोनों देशों ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष आयोजन करने का निर्णय लिया है।

इस अवसर को “Tagore and Dewantara Cultural and Educational Diplomacy Year” के रूप में मनाया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य—

  • सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना
  • शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना
  • युवाओं के बीच आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना

है।

वैश्विक मुद्दों पर भी रखा भारत का पक्ष

संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संघर्षों पर भी भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा कि—

  • वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति पहले से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
  • भारत हर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।
  • फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत लंबे समय से ‘दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution)’ और स्थायी शांति का समर्थन करता रहा है।

भारत-इंडोनेशिया संबंध क्यों हैं महत्वपूर्ण?

भारत और इंडोनेशिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो प्रमुख लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक, सामरिक और समुद्री संबंध क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

नई साझेदारियों से न केवल दोनों देशों के व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, रक्षा सहयोग, स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलेंगे।