June 27, 2026

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रायपुर के नकटी गांव में फिर बवाल: 48 घंटे के नोटिस के बाद पहुंचे बुलडोजर, PM आवास तोड़ने के आरोप से भड़के ग्रामीण

राजधानी रायपुर के नकटी गांव में एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। प्रशासन द्वारा घर खाली करने के लिए दिए गए 48 घंटे के नोटिस की अवधि समाप्त होते ही शुक्रवार को भारी पुलिस बल और प्रशासनिक टीम कार्रवाई के लिए गांव पहुंच गई। प्रशासन की टीम के पहुंचते ही ग्रामीणों ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया, जिसके चलते गांव में माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।

जानकारी के अनुसार प्रशासन एक दर्जन से अधिक मकानों को हटाने की कार्रवाई करने पहुंचा था। हालांकि ग्रामीणों के विरोध के चलते कार्रवाई को लेकर स्थिति विवादपूर्ण हो गई और पुलिस तथा ग्रामीणों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

गांव के बाहर ही रोक दी प्रशासन की टीम

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें घर खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका कहना है कि केवल 48 घंटे का नोटिस देकर परिवारों को घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है।

जब प्रशासनिक अमला गांव पहुंचा तो बड़ी संख्या में ग्रामीण गांव के बाहर एकत्र हो गए और अधिकारियों से कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे। विरोध बढ़ने पर पुलिस बल को भी स्थिति संभालने के लिए आगे आना पड़ा।

प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों पर भी उठे सवाल

विवाद का सबसे बड़ा कारण यह है कि ग्रामीणों का दावा है कि जिस जमीन को अब चारागाह भूमि बताकर खाली कराया जा रहा है, उसी स्थान पर सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई परिवारों के लिए पक्के मकान बनाए गए थे।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जमीन सरकारी रिकॉर्ड में चारागाह थी, तो फिर उसी स्थान पर सरकारी योजनाओं के तहत आवास निर्माण की अनुमति कैसे दी गई। इस मुद्दे ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

1300 से अधिक लोगों पर बेघर होने का खतरा

ग्रामीणों के मुताबिक इस कार्रवाई से गांव की बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है। उनका दावा है कि लगभग 1300 से अधिक लोग वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं और उनके पूर्वज भी इसी जमीन पर रहते आए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था, पुनर्वास और उचित मुआवजे के वे अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उनका आरोप है कि क्षेत्र की जमीन को खाली कराकर किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग करने की योजना बनाई जा रही है।

पुनर्वास और मुआवजे की मांग तेज

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। साथ ही उचित मुआवजा और वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए ताकि लोगों को बेघर होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनके अधिकारों और जीवनभर की जमा पूंजी को नजरअंदाज कर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।

प्रशासन और ग्रामीणों के बीच जारी है गतिरोध

फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। दूसरी ओर ग्रामीण अपने घरों और जमीन को बचाने के लिए आंदोलन की तैयारी में जुटे हुए हैं।

रायपुर के नकटी गांव का यह विवाद अब केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पुनर्वास, मुआवजा और आवासीय अधिकारों से जुड़ा बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच होने वाली बातचीत इस मामले की दिशा तय करेगी।