छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में स्थित बरमकेला अपेक्स बैंक शाखा में सामने आए करीब 18.13 करोड़ रुपये के गबन मामले में बैंक प्रबंधन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच शाखा प्रबंधक, लेखाधिकारी और लिपिक सहित आठ कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) द्वारा किए जाने की तैयारी है।
यह मामला सामने आने के बाद सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। बैंक प्रबंधन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी और गबन की पूरी राशि की वसूली की जाएगी।
शाखा प्रबंधक समेत 8 कर्मचारियों पर गिरी कार्रवाई की गाज
बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता के अनुसार, गबन मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक डीआर वाघमारे, लेखाधिकारी मीनाक्षी मांझी और लिपिक आशीष कुमार पटेल को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
इसके अलावा पांच आउटसोर्स कर्मचारियों को भी नौकरी से हटा दिया गया है, जिनमें शामिल हैं—
- लिकेश कुमार बैरागी
- रमाकांत श्रीवास्तव
- अरुण चंद्राकर
- खीरदास महंत
- बालकृष्ण कर्ष
बैंक ने स्पष्ट किया है कि मामले में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से नियमानुसार राशि की वसूली की जाएगी।
2021 से 2024 के बीच हुआ करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2024 के बीच समितियों और डीएमआर खातों में नियमों के विपरीत लेन-देन किए गए। आरोप है कि करोड़ों रुपये का अनाधिकृत हस्तांतरण विभिन्न खातों में किया गया और बाद में नकद निकासी के जरिए राशि का दुरुपयोग किया गया।
मामले के सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन ने विशेष ऑडिट और उच्च स्तरीय जांच कराई, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई। इससे पहले भी इस प्रकरण में आठ कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
EOW जांच से खुल सकते हैं नए नाम
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से जांच कराने के लिए सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हो चुकी है। माना जा रहा है कि EOW की जांच के दौरान कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई नई परतें खुल सकती हैं।
887 किसानों के खातों में गड़बड़ी का आरोप
जानकारी के मुताबिक बरमकेला शाखा से जुड़ी 17 सेवा सहकारी समितियों के 887 किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) खातों में अनियमितताएं पाई गई हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि डीएमआर कैश और काइंड बैलेंस को शून्य दिखाकर राशि को अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया और बाद में नकद निकासी की गई।
यह मामला बड़े नवापारा, बोंदा, दुलोपाली, लेंध्रा, लोधिया, लुकापारा, साल्हेओना, सरिया, तौसीर, देवगांव, गोबरसिंघा, कालाखूंटा, कंठीपाली, करनपाली, कुम्हारी और पंचधार समितियों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
बैंकिंग व्यवस्था में किए जा रहे तकनीकी सुधार
बैंक प्रबंधन का दावा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कई तकनीकी सुधार लागू किए गए हैं।
इनमें शामिल हैं—
- किसानों के नाम पर फर्जी ऋण वितरण रोकने के लिए नया सॉफ्टवेयर।
- ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण।
- डिजिटल निगरानी और पारदर्शी बैंकिंग व्यवस्था।
- जवाबदेही तय करने के लिए नई मॉनिटरिंग प्रणाली।
सख्ती का असर, बैंक का मुनाफा भी बढ़ा
बैंक के अनुसार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का सकारात्मक असर वित्तीय प्रदर्शन पर भी देखने को मिला है। वर्ष 2024-25 में बैंक ने 38.99 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 40.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
बरमकेला अपेक्स बैंक घोटाला अब प्रदेश के सबसे चर्चित सहकारी बैंक घोटालों में शामिल हो गया है। EOW जांच शुरू होने के बाद इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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