हर घर मुनगा
बस्तर संभाग के सुकमा जिले से पोषण और पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरणादायक संदेश सामने आया है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने लस्केपारा (छिंदगढ़) स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र की पोषण वाटिका में बच्चों के साथ मुनगा और पपीता के पौधे लगाकर “हर घर मुनगा, घर-घर सुपोषण” का संदेश दिया।
इस पहल का उद्देश्य केवल पौधरोपण नहीं, बल्कि समाज में पोषण, स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को मजबूत करना है। मंत्री ने बच्चों के साथ मिलकर पौधे लगाए और उन्हें प्रकृति से जुड़ने की सीख दी।
बच्चों को बताया मुनगा और पपीता का महत्व
कार्यक्रम के दौरान मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बच्चों को सरल भाषा में समझाया कि मुनगा और पपीता जैसे पौधे केवल पेड़ नहीं, बल्कि पोषण का प्राकृतिक स्रोत हैं।
उन्होंने बताया—
- मुनगा की पत्तियां, फलियां और फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं
- यह कुपोषण से लड़ने में बेहद मददगार है
- पपीता विटामिन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत है
- ये दोनों पौधे बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं
मंत्री ने बच्चों के हाथों से भी पौधरोपण करवाया, जिससे उनमें प्रकृति के प्रति जुड़ाव और जागरूकता बढ़ सके।
“हर घर मुनगा” अभियान से कुपोषण पर वार
लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुनगा को अब “सुपोषण वृक्ष” के रूप में पहचाना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर घर में पोषण का प्राकृतिक स्रोत उपलब्ध हो।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि—
- हर घर में कम से कम एक मुनगा का पौधा लगाया जाए
- बच्चों के आहार में स्थानीय और प्राकृतिक भोजन को शामिल किया जाए
- पोषण वाटिकाओं का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए
मंत्री ने कहा कि यदि हर परिवार यह पहल अपनाए, तो कुपोषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पोषण, स्वास्थ्य और पर्यावरण का संगम
इस कार्यक्रम को केवल एक पौधरोपण अभियान नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य पोषण सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना है।
मंत्री ने कहा कि—
- स्वस्थ बचपन ही मजबूत समाज की नींव है
- सुपोषित परिवार ही विकसित राज्य की पहचान है
- हरित वातावरण आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है
सुपोषण अभियान को मिल रही नई गति
राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे सुपोषण अभियान के तहत पोषण वाटिकाओं का विस्तार किया जा रहा है। इन वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और माताओं को स्थानीय स्तर पर ताजा और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और लोग इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने लगे हैं।
बस्तर से पूरे प्रदेश तक संदेश
बस्तर के सुकमा जिले से शुरू हुआ यह संदेश अब पूरे छत्तीसगढ़ में पोषण और हरियाली के प्रति जागरूकता फैला रहा है।
“हर घर मुनगा, घर-घर सुपोषण” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक ऐसा आंदोलन बनता जा रहा है जो आने वाले समय में स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरण तीनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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