June 26, 2026

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SBI को 1266 करोड़ की चपत! ED की बड़ी कार्रवाई, कारोबारी की 3.66 करोड़ की विदेशी इंश्योरेंस पॉलिसी अटैच

मध्य प्रदेश में सामने आए 1266 करोड़ रुपये के बड़े बैंकिंग फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जांच के दौरान एक कारोबारी की करोड़ों रुपये की विदेशी इंश्योरेंस पॉलिसियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है।

यह कार्रवाई कथित तौर पर बैंक फंड के दुरुपयोग और विदेशों में निवेश के जरिए संपत्ति बनाने के मामले में की गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला देश के बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक माना जा रहा है।

3.66 करोड़ की पॉलिसी पर ED का शिकंजा

प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के दौरान दो इन्वेस्टमेंट लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों को अटैच किया है, जिनकी कुल सरेंडर वैल्यू करीब 3.66 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

जांच एजेंसी के अनुसार, ये पॉलिसियां विदेशी वित्तीय संस्थान के माध्यम से संचालित की जा रही थीं और इन्हें कथित तौर पर विदेशों में मौजूद खातों से फंड किया गया था।

कैसे हुआ 1266 करोड़ रुपये का कथित फ्रॉड?

जांच में सामने आया है कि संबंधित कंपनी और उसके प्रमोटर्स पर फर्जी व्यापारिक लेनदेन और दस्तावेजों में हेरफेर कर बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने का आरोप है।

एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर निम्न तरीकों का इस्तेमाल किया गया—

  • फर्जी मर्चेंटिंग ट्रेड ट्रांजैक्शन
  • सर्कुलर ट्रेडिंग
  • व्यापारिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर
  • बैंक फंड को अन्य कंपनियों में ट्रांसफर करना
  • घरेलू और विदेशी संस्थाओं के माध्यम से रकम का निवेश

इन गतिविधियों के जरिए बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

CBI की FIR के बाद शुरू हुई जांच

मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। आरोप है कि बैंक को 1266.63 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू हुई, जिसमें कई वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की पड़ताल की गई।

पहले भी जब्त हो चुकी हैं करोड़ों की संपत्तियां

इस मामले में जांच एजेंसी इससे पहले भी बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। जांच के दौरान—

  • विदेश में स्थित कई अचल संपत्तियों को अटैच किया गया था।
  • भारत में मौजूद करोड़ों रुपये की संपत्तियां भी जांच के दायरे में लाई गई थीं।
  • कई कंपनियों और बैंक खातों के वित्तीय लेनदेन की जांच की गई थी।

सरेंडर से पहले ही ED ने की कार्रवाई

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कारोबारी ने हाल ही में इन इंश्योरेंस पॉलिसियों को सरेंडर करने का अनुरोध किया था और रकम को भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

जांच एजेंसी को आशंका थी कि यदि रकम जारी हो जाती है तो कथित अपराध से जुड़ी कमाई को खर्च या ट्रांसफर किया जा सकता है। इसी वजह से एजेंसी ने समय रहते कार्रवाई करते हुए पॉलिसियों को अटैच कर दिया।

क्यों अहम है यह मामला?

  • यह देश के बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामलों में शामिल माना जा रहा है।
  • मामले में विदेशों में निवेश और संपत्ति खरीद के पहलू सामने आए हैं।
  • जांच एजेंसियां कथित अपराध से जुड़ी संपत्तियों का पता लगाने में जुटी हैं।
  • आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां कथित तौर पर अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।