June 24, 2026

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मोहर्रम जुलूस में डीजे और आतिशबाजी पर रोक नहीं! हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के आदेश पर लगाई ब्रेक

मोहर्रम जुलूस

छत्तीसगढ़ में मोहर्रम को लेकर जारी विवाद के बीच हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले ने पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया है। अदालत ने मोहर्रम जुलूसों में डीजे, ब्रास बैंड, धुमाल और आतिशबाजी के उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंध के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब मोहर्रम के धार्मिक कार्यक्रम पहले से शुरू हो चुके हैं और मुख्य जुलूस आयोजित होने में केवल कुछ ही दिन शेष हैं। अदालत ने माना कि इस समय अचानक प्रतिबंध लागू करने से सामाजिक असंतोष और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

दरअसल, राज्य स्तर पर जारी एक आदेश में मोहर्रम कमेटियों और ताजिया आयोजकों को जुलूसों के दौरान डीजे, पटाखे और बैंड का उपयोग नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। इतना ही नहीं, नियमों के उल्लंघन की स्थिति में 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया था।

इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया कि इस प्रकार के प्रतिबंध लगाने का अधिकार संबंधित प्रशासन और पुलिस विभाग के पास होता है, किसी अन्य संस्था के पास नहीं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि:

• मोहर्रम से जुड़े धार्मिक आयोजन पहले से जारी हैं।
• जुलूसों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
• अचानक प्रतिबंध से लोगों में भ्रम और नाराजगी फैल सकती है।
• इससे शांति व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और अंतरिम राहत देते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का फैसला सुनाया।

फिलहाल इसका मतलब यह है कि आगामी मोहर्रम जुलूसों के दौरान संबंधित कमेटियों पर प्रतिबंध और जुर्माने का आदेश लागू नहीं होगा। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि ध्वनि प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी सामान्य नियम लागू नहीं होंगे। प्रशासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और स्थानीय कानूनों का पालन करना सभी आयोजकों के लिए अनिवार्य रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। त्योहारों की परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व का सम्मान करते हुए सुरक्षा और शांति बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

अब इस मामले में संबंधित पक्षों को अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया है। अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि प्रतिबंधात्मक आदेश कानूनी रूप से कितना वैध था और भविष्य में इस प्रकार के मामलों में अधिकार क्षेत्र किस संस्था के पास रहेगा।

फिलहाल हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद राज्यभर की मोहर्रम कमेटियों और आयोजकों को बड़ी राहत मिली है। आने वाले दिनों में इस मामले पर सभी की नजरें बनी रहेंगी क्योंकि इसका असर भविष्य में धार्मिक आयोजनों से जुड़े प्रशासनिक फैसलों पर भी पड़ सकता है।