छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से संचालित गुटखा निर्माण और पैकेजिंग यूनिट का भंडाफोड़ किया है। आरोप है कि डिटर्जेंट पाउडर निर्माण का झांसा देकर किराए पर लिए गए गोदाम में जर्दायुक्त गुटखा तैयार किया जा रहा था। मामले के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
पुलिस के अनुसार मामला जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के कचांदुर गांव का है, जहां एक गोदाम को कथित रूप से डिटर्जेंट पाउडर निर्माण के लिए किराए पर लिया गया था। लेकिन अंदर चल रही गतिविधियां कुछ और ही कहानी बयां कर रही थीं।
डिटर्जेंट फैक्ट्री के नाम पर लिया गया था गोदाम
जानकारी के मुताबिक गोदाम मालिक को किराएदार ने बताया था कि वह यहां डिटर्जेंट पाउडर बनाने का काम शुरू करेगा। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ दिनों बाद गोदाम मालिक को संदेह होने लगा।
बताया जा रहा है कि गोदाम किराए पर लेने के बाद संबंधित व्यक्ति का संपर्क लगभग पूरी तरह बंद हो गया था। उसका मोबाइल फोन लगातार बंद आने लगा, जिससे गोदाम मालिक को शक हुआ।
इसी संदेह के आधार पर मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।
पुलिस जांच में हुआ बड़ा खुलासा
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और गोदाम की जांच शुरू की। तलाशी के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में तैयार गुटखा और निर्माण सामग्री बरामद हुई।
जांच में पुलिस को मिला—
- 32 बड़े बोरे तैयार गुटखे के
- 32 बोरे मीठी सुपारी
- गुटखा निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल
- पैकिंग मशीनें
- मिक्सिंग मशीनें
- पैकेजिंग से संबंधित अन्य उपकरण
बरामद सामग्री की मात्रा को देखते हुए पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए अन्य विभागों को भी सूचना दी।
फूड सेफ्टी विभाग भी जांच में शामिल
मौके पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को बुलाया गया, जिसने बरामद सामग्री की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि यहां अवैध रूप से गुटखा निर्माण और पैकेजिंग का कार्य संचालित किया जा रहा था।
फूड सेफ्टी विभाग अब यह जांच करेगा कि बरामद उत्पादों में कौन-कौन से पदार्थों का उपयोग किया गया था और क्या वे स्वास्थ्य मानकों का उल्लंघन करते हैं।
किराएदार की तलाश में जुटी पुलिस
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोदाम संचालित करने वाले लोग आखिर कहां गायब हो गए। पुलिस अब गोदाम किराए पर लेने वाले व्यक्ति और उससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क केवल दुर्ग तक सीमित था या इसका संबंध अन्य जिलों और राज्यों से भी था।
अवैध गुटखा कारोबार पर लगातार कार्रवाई
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जर्दायुक्त गुटखा और तंबाकू उत्पाद गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में अवैध निर्माण इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई को सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि जिले में अवैध खाद्य और तंबाकू उत्पादों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

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