छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने एक बार फिर महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरगुजा संभाग के सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों से जुड़े मामलों की संयुक्त जनसुनवाई में आयोग ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इस दौरान 32 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें से 15 मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया। सबसे चर्चित मामला कृषि विभाग से जुड़ा रहा, जिसमें महिला कर्मचारियों की शिकायत के बाद एक प्रभारी कृषि अधिकारी के निलंबन की अनुशंसा की गई।
रायपुर में आयोजित इस जनसुनवाई की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने की। यह आयोग की प्रदेश स्तर पर 402वीं और जिला स्तर पर 11वीं जनसुनवाई थी। सुनवाई के दौरान महिलाओं से जुड़े पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक और कार्यस्थल उत्पीड़न से संबंधित मामलों पर विस्तार से विचार किया गया।
दांपत्य विवाद में पति को देना होगा 20 हजार रुपये प्रतिमाह
जनसुनवाई में एक दांपत्य विवाद का मामला सामने आया, जिसमें आयोग ने पति-पत्नी के रिश्ते में सुधार लाने के लिए विशेष निर्देश जारी किए। पति को अपनी पत्नी को हर महीने 20 हजार रुपये भरण-पोषण राशि देने का आदेश दिया गया। साथ ही उसे नियमित रूप से सखी वन स्टॉप सेंटर में उपस्थित होकर पारिवारिक परामर्श लेने के निर्देश भी दिए गए।
आयोग ने इस मामले की आगामी एक वर्ष तक निगरानी करने की जिम्मेदारी सखी वन स्टॉप सेंटर, अंबिकापुर को सौंपी है ताकि दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य बना रहे।
संपत्ति विवाद और पारिवारिक मामलों का समाधान
सुनवाई के दौरान पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। आयोग ने दोनों पक्षों को तहसील कार्यालय में खाता पृथक्करण के लिए आवेदन करने की सलाह दी।
इसके अलावा कुछ पारिवारिक विवादों में पक्षकारों को आपसी सहमति से समझौता करने या न्यायालय की शरण लेने का सुझाव दिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि जो मामले पहले से न्यायालय में विचाराधीन हैं, उनमें वह हस्तक्षेप नहीं करेगा।
लापता महिला और नौकरी से निकाली गई कर्मचारी के मामले में निर्देश
एक लंबे समय से लापता महिला के मामले में आयोग ने बलरामपुर पुलिस प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
वहीं एक निजी शिक्षण संस्था से महिला कर्मचारी को बिना उचित प्रक्रिया के नौकरी से निकालने की शिकायत पर आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के आदेश दिए। आयोग ने संबंधित महिला को एक वर्ष के वेतन के बराबर राहत दिलाने और दो माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
बीमा दावा और बैंक को भी मिला निर्देश
एक अन्य मामले में महिला का बीमा दावा लंबे समय से लंबित था। आयोग ने संबंधित बैंक और बीमा कंपनी को एक माह के भीतर प्रकरण का निराकरण करने का निर्देश दिया। साथ ही संरक्षण अधिकारी को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
कृषि विभाग के अधिकारी पर गंभीर आरोप
जनसुनवाई का सबसे गंभीर मामला कृषि विभाग से जुड़ा रहा। महिला कर्मचारियों ने प्रभारी एसएडीओ विनायक पाण्डेय पर कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार, अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए।
मामले को गंभीर मानते हुए महिला आयोग ने:
- तत्काल निलंबन की अनुशंसा की।
- विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए।
- दो वेतनवृद्धियां रोकने संबंधी कार्रवाई की सिफारिश की।
- दो माह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा।
महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाना प्राथमिकता
महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जनसुनवाई के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं का संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ समाधान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायत सुनना नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं को वास्तविक राहत और न्याय दिलाना है। यही कारण है कि जनसुनवाई के माध्यम से लगातार मामलों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है।
महिला आयोग की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, पारिवारिक उत्पीड़न या अधिकारों के हनन के मामलों में प्रशासन और आयोग अब पहले से अधिक सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार हैं।

More Stories
सरायपाली डायमंड ब्लॉक : 200 टन मलबे की प्रोसेसिंग से निकले 5 बेशकीमती हीरे
Alert! दुर्ग में इस लोकप्रिय मैंगो आइस कैंडी पर लगा बैन, जांच में निकली असुरक्षित; तुरंत जानें पूरा मामला
रायपुर में GST का बड़ा छापा: 1 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गई, कई फैक्ट्रियों पर एक साथ कार्रवाई से कारोबारियों में हड़कंप