अंबिकापुर। अंबिकापुर में शराब की बोतलों पर निर्धारित कीमत से अधिक वसूली का मामला एक बड़े प्रशासनिक एक्शन में बदल गया। महज 100 रुपये की अतिरिक्त वसूली ने आबकारी विभाग के एक उप निरीक्षक की कुर्सी छीन ली। राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच में विदेशी मदिरा दुकान में ओवररेटिंग की पुष्टि होने के बाद आबकारी आयुक्त ने संबंधित आबकारी उप निरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इस कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। साथ ही जिला और सहायक जिला आबकारी अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
कैसे खुला ओवररेटिंग का मामला?
जानकारी के अनुसार अंबिकापुर शहर के बौरीपारा स्थित विदेशी कम्पोजिट मदिरा दुकान में राज्य स्तरीय उड़नदस्ता ने आकस्मिक निरीक्षण किया। जांच के दौरान एक छद्म ग्राहक के माध्यम से शराब बिक्री की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया गया।
जांच में पाया गया कि दुकान में कार्यरत विक्रयकर्ता ने:
- 20 पाव गोल्डन गोवा व्हिस्की बेची
- निर्धारित दर 120 रुपये प्रति पाव थी
- कुल कीमत 2400 रुपये बनती थी
- ग्राहक से 2500 रुपये वसूले गए
- यानी 100 रुपये अतिरिक्त लिए गए
जांच दल ने इसे निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली यानी ओवररेटिंग माना।
विक्रेता के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
अनियमितता सामने आने के बाद शराब विक्रेता नरेन्द्र कुमार यादव के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
विभागीय जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित दुकान उस क्षेत्र के अंतर्गत आती है जिसकी निगरानी आबकारी उप निरीक्षक अनिल गुप्ता के जिम्मे थी। ऐसे में अधिकारियों ने इसे निगरानी में कमी और कर्तव्य के प्रति लापरवाही माना।
उप निरीक्षक पर गिरी गाज
आबकारी आयुक्त ने आदेश में कहा कि क्षेत्र में इस प्रकार की गंभीर अनियमितता पाया जाना अधिकारी की शिथिल कार्यप्रणाली और नियंत्रण की कमी को दर्शाता है।
इसके आधार पर:
- आबकारी उप निरीक्षक अनिल गुप्ता को निलंबित किया गया
- निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू किया गया
- निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय सरगुजा संभागीय उड़नदस्ता कार्यालय निर्धारित किया गया
- नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देने का आदेश दिया गया
दो वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस
मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने:
- जिला आबकारी अधिकारी लक्ष्मीकांत गायकवाड
- सहायक जिला आबकारी अधिकारी शीला बड़ा
को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
दोनों अधिकारियों से सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है।
विभाग के भीतर भी उठे सवाल
कार्रवाई के बाद विभाग के कुछ अधिकारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार कुछ अधिकारियों का मानना है कि अतिरिक्त वसूली की राशि केवल 100 रुपये थी और ग्राहक के वापस लौटने से पहले राशि लौटाने का अवसर नहीं मिला।
हालांकि यह केवल विभागीय चर्चा का विषय है। आधिकारिक स्तर पर आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलना गंभीर अनियमितता है और इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार का साफ संदेश
इस कार्रवाई से यह संकेत मिला है कि शराब बिक्री में पारदर्शिता और निर्धारित मूल्य का पालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार सख्त रुख अपना रही है।
विभाग ने दिए स्पष्ट संकेत
- शराब की ओवररेटिंग बर्दाश्त नहीं होगी
- निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे
- लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी
- उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जाएगी
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
अंबिकापुर की यह घटना दिखाती है कि छोटी दिखने वाली अनियमितताएं भी बड़े प्रशासनिक परिणाम ला सकती हैं। सरकार और आबकारी विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शराब दुकानों में निर्धारित दरों का पालन हो और उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वसूली न की जाए।
100 रुपये की ओवररेटिंग पर हुई यह कार्रवाई अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है और इसे आबकारी विभाग की जवाबदेही तय करने वाले एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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