जांजगीर जिले के खरौद नगर में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर गुरुवार को बड़ी संख्या में महिलाओं और नगरवासियों ने नगर पंचायत कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपते हुए जलभराव, पेयजल संकट, भूमि पट्टा वितरण और शौचालय निर्माण जैसी समस्याओं के समाधान की मांग की। महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
महिलाओं की बड़ी भागीदारी, प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि नगर की कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं, लेकिन अब तक उनका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसी कारण बड़ी संख्या में महिलाएं नगर पंचायत कार्यालय पहुंचीं और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
बारिश से पहले जलभराव की समस्या दूर करने की मांग
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा जलभराव का रहा। नगरवासियों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान कई वार्डों में पानी भर जाता है।
जलभराव से होने वाली प्रमुख परेशानियां:
- घरों में बारिश का पानी घुसना
- सड़कों और गलियों में आवागमन बाधित होना
- गंदगी और मच्छरों का बढ़ना
- संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ना
लोगों ने मांग की कि बारिश शुरू होने से पहले नालियों की सफाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पेयजल संकट से परेशान महिलाएं
नगर के कई वार्डों में पेयजल की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। महिलाओं ने बताया कि उन्हें रोजाना दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे काफी समय और श्रम खर्च होता है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जब तक स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं बनती, तब तक प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से पानी के टैंकर भेजे जाएं।
आवास योजना की सूची सार्वजनिक करने की मांग
नगरवासियों ने समग्र नगर आवास योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि चयनित और रिजेक्ट आवेदकों की सूची सार्वजनिक नहीं होने से लोगों को जानकारी नहीं मिल पा रही है कि उनका आवेदन किस कारण निरस्त हुआ।
लोगों की मांग:
- चयनित हितग्राहियों की सूची सार्वजनिक की जाए।
- निरस्त आवेदनों के कारण बताए जाएं।
- पात्र लोगों को दोबारा आवेदन का अवसर मिले।
30 वर्षों से रह रहे परिवारों को नहीं मिला पट्टा
ज्ञापन में भूमि पट्टा वितरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई परिवार 25 से 30 वर्षों से एक ही स्थान पर निवास कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें भूमि का स्वामित्व अधिकार नहीं मिला।
पट्टा नहीं होने के कारण ऐसे परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि कई पात्र परिवार राजनीतिक कारणों से भी पट्टा पाने से वंचित रह गए हैं।
ओडीएफ दावे पर उठे सवाल
महिलाओं ने नगर को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किए जाने पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि आज भी कई परिवारों के घरों में शौचालय नहीं हैं।
महिलाओं की प्रमुख समस्याएं:
- खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
- सुरक्षा संबंधी खतरे बने रहते हैं।
- बरसात में परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
प्रदर्शनकारियों ने सभी पात्र परिवारों को जल्द शौचालय निर्माण योजना का लाभ देने की मांग की।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के बाद महिलाओं और नगरवासियों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
नगरवासियों का कहना है कि यह केवल सुविधाओं की मांग नहीं, बल्कि उनके जीवन स्तर और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। अब वे आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और समस्याओं के स्थायी समाधान तक अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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