रामानुजगंज। जिले में कथित फर्जी KCC ऋण और धान खरीदी की लंबित भुगतान राशि को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सामने किसानों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हो रहे हैं और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।
किसानों का आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण दर्ज किए गए हैं। इन कथित ऋणों के कारण धान बिक्री की भुगतान राशि रोक दी गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
धरने को मिल रहा व्यापक समर्थन
किसान नेता नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को लगातार समर्थन मिल रहा है। किसान कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री विकास दुबे सहित कई संगठनों ने भी किसानों की मांगों को जायज बताया है।
धरना स्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पुलिस बल भी तैनात किया है। आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जेल में रहने के दौरान खाते से निकला ऋण?
आंदोलन के दौरान सामने आए एक मामले ने सभी को चौंका दिया है।
ग्राम अनिरुद्धपुर निवासी विरेन्द्र सिंह का आरोप है कि वर्ष 2019 और 2021 में उनके नाम पर कुल 76 हजार रुपये का KCC ऋण आहरित दिखाया गया है। जबकि उनका दावा है कि वे 1 सितंबर 2018 से 22 फरवरी 2023 तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल में थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वे जेल में बंद थे, तब उनके नाम पर ऋण कैसे स्वीकृत और आहरित हो गया? किसान इसे गंभीर अनियमितता का मामला बता रहे हैं।
मृतक किसान के नाम पर 3.10 लाख का ऋण!
एक अन्य मामले में ग्राम ताम्बेश्वर नगर निवासी कृष्णा अधिकारी ने प्रशासन को शिकायत दी है कि उनके पिता स्वर्गीय गुरूपद अधिकारी का निधन 23 जनवरी 2021 को हो चुका था।
परिवार का आरोप है कि मृत्यु के करीब छह महीने बाद 17 जुलाई 2021 को उनके नाम पर 3 लाख 10 हजार रुपये का KCC ऋण स्वीकृत और आहरित दिखाया गया। इस मामले ने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है।
किसानों ने उठाए बड़े सवाल
आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें—
- किसानों की जानकारी के बिना ऋण दर्ज किए गए।
- धान भुगतान राशि रोक दी गई।
- बैंकिंग प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं हुईं।
- संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई।
किसानों का आरोप है कि इन कथित फर्जी ऋणों के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री को सौंपा था ज्ञापन
किसानों के अनुसार 9 जून 2026 को मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई थी।
मुख्य मांगें—
- कथित फर्जी KCC ऋण मामलों की जांच
- दोषियों पर कार्रवाई
- लंबित धान भुगतान जारी करना
- किसानों के खातों की निष्पक्ष जांच
किसानों का कहना है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री अरविंद दुबे ने कहा कि मृत व्यक्ति के नाम पर ऋण स्वीकृत होना और जेल में बंद किसान के खाते से ऋण आहरित दिखाया जाना बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेता नरेंद्र सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका दावा है कि निष्पक्ष जांच होने पर जिले में करोड़ों रुपये के कथित फर्जी KCC ऋण मामलों का खुलासा हो सकता है।
फिलहाल किसान दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं। यह मामला अब केवल धान भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था, सहकारी संस्थाओं और प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर शासन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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