June 16, 2026

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महादेव सट्टा एप मामले में नया बवाल! सौरभ चंद्राकर संग वायरल चैट पर भूपेश बघेल का पलटवार, बोले- ‘फर्जी स्क्रीनशॉट के पीछे कौन है, पता चल गया’

रायपुर में एक बार फिर चर्चित महादेव सट्टा एप मामला सुर्खियों में आ गया है। इस बार विवाद की वजह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक कथित चैट स्क्रीनशॉट है, जिसमें महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि भूपेश बघेल ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे फर्जी और फोटोशॉप से तैयार किया गया स्क्रीनशॉट बताया है।

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया गया कि सौरभ चंद्राकर के कथित इंस्टाग्राम अकाउंट पर भूपेश बघेल के नाम से जुड़े यूजरनेम से संदेशों का आदान-प्रदान हुआ था। इसी आधार पर कुछ पोर्टलों और सोशल मीडिया पेजों ने खबरें भी प्रकाशित कीं।

भूपेश बघेल ने किया जोरदार पलटवार

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से वायरल दावे का खंडन किया। उन्होंने कहा कि सुबह से एक फर्जी फोटोशॉप आधारित खबर चलाई जा रही है, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

बघेल ने दावा किया कि वायरल वीडियो में दिखाए गए चैट बॉक्स की जांच करने पर स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित यूजरनेम के साथ किसी प्रकार का मैसेज आदान-प्रदान नहीं हुआ है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना तथ्य जांचे किसी भी सामग्री पर भरोसा न करें।

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

भूपेश बघेल ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि फर्जी खबर फैलाने वालों और इसके पीछे काम कर रहे लोगों की जानकारी उनके पास पहुंच चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लीगल टीम पूरे मामले की जांच कर रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने मीडिया संस्थानों को भी सलाह दी कि किसी भी वायरल सामग्री को प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

क्या है महादेव सट्टा एप मामला?

महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में से एक रहा है। इस मामले में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को मुख्य संचालक माना जाता है। जांच एजेंसियां लंबे समय से इस नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों और कथित लेन-देन की जांच कर रही हैं।

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले भी इस मामले ने राजनीतिक हलकों में काफी हलचल मचाई थी। उस दौरान विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई और कई आरोपों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस हुई थी। हालांकि संबंधित आरोपों और दावों पर अलग-अलग पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए थे।

सोशल मीडिया पर बढ़ा फेक कंटेंट का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फोटो एडिटिंग टूल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के कारण फर्जी स्क्रीनशॉट और भ्रामक सामग्री तेजी से फैल रही है। ऐसे में किसी भी वायरल पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी हो गया है।

फिलहाल इस कथित चैट स्क्रीनशॉट को लेकर विवाद जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मामले में कोई आधिकारिक जांच या फॉरेंसिक सत्यापन सामने आता है या नहीं। साथ ही, भूपेश बघेल की ओर से घोषित कानूनी कार्रवाई इस विवाद को किस दिशा में ले जाती है, यह भी देखने वाली बात होगी।