पश्चिम बंगाल में 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोलकाता दौरे और रेड रोड पर प्रस्तावित विशाल योग कार्यक्रम के बीच अब सार्वजनिक स्थलों के उपयोग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कुछ मुस्लिम संगठनों और धार्मिक नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब सड़क पर नमाज की अनुमति नहीं दी जाती, तो योग दिवस जैसे कार्यक्रम के लिए रेड रोड को क्यों खोला जा रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोलकाता में हजारों लोगों के साथ योग करने वाले हैं। प्रशासन के अनुसार इस कार्यक्रम में लगभग 30 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए रेड रोड समेत शहर की कई प्रमुख सड़कों पर विशेष यातायात व्यवस्था लागू की गई है।
कोलकाता में बड़े स्तर पर तैयारियां
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।
मुख्य तैयारियां:
- रेड रोड पर विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन
- करीब 30 हजार प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना
- कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रतिबंध
- विशेष सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी
- कोलकाता पुलिस द्वारा ट्रैफिक एडवाइजरी जारी
प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, इसलिए सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
नमाज और योग कार्यक्रम को लेकर उठा विवाद
कार्यक्रम की घोषणा के बाद कुछ धार्मिक नेताओं और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूर्व में सार्वजनिक सड़कों पर नमाज को यातायात और जनसुविधा का हवाला देकर सीमित किया गया था।
उनका तर्क है कि यदि सड़क बंद होने से लोगों को परेशानी होती है, तो वही नियम सभी आयोजनों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
कुछ धार्मिक नेताओं ने संविधान में समानता के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून और प्रशासनिक नियम सभी समुदायों के लिए एक समान होने चाहिए।
बीजेपी ने दिया जवाब
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम राष्ट्रीय महत्व का आयोजन है और इसकी तुलना किसी धार्मिक गतिविधि से नहीं की जानी चाहिए।
भाजपा नेताओं का कहना है:
- योग दिवस एक वैश्विक और राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
- कार्यक्रम किसी एक धर्म या समुदाय से जुड़ा नहीं है।
- प्रधानमंत्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- राष्ट्रीय आयोजनों के लिए विशेष व्यवस्थाएं सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है और इसका उद्देश्य स्वास्थ्य एवं फिटनेस को बढ़ावा देना है।
क्यों खास है इस बार का योग दिवस?
इस बार का कार्यक्रम कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
- नई सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री का पहला बड़ा कोलकाता दौरा।
- पश्चिम बंगाल दिवस और योग दिवस कार्यक्रम में भागीदारी।
- बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम की चर्चा।
योग दिवस के आयोजन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
राजनीति के केंद्र में आया रेड रोड
कोलकाता का रेड रोड लंबे समय से बड़े सरकारी और सार्वजनिक आयोजनों का प्रमुख स्थल रहा है। हालांकि, इस बार योग दिवस कार्यक्रम को लेकर उठे सवालों ने इसे राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।
एक पक्ष इसे राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सार्वजनिक स्थलों के उपयोग में समानता की मांग कर रहा है।
फिलहाल प्रशासन कार्यक्रम की तैयारियों में जुटा हुआ है और सभी की नजर 21 जून को होने वाले इस बहुचर्चित आयोजन पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।

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