सोना और चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों और आम खरीदारों की नजर लगातार बुलियन मार्केट पर बनी हुई है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में सोना और चांदी दोनों दबाव में नजर आए, लेकिन बाद में इनमें कुछ सुधार देखने को मिला।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सुबह के कारोबार के दौरान सोने और चांदी में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई कर ली। निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतों, महंगाई के आंकड़ों और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
सुबह गिरावट के साथ खुला बाजार
कारोबार की शुरुआत में सोना वायदा करीब 388 रुपये टूटकर 1,53,396 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं चांदी वायदा में भी कमजोरी देखने को मिली और इसका भाव 2,43,932 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
हालांकि बाद में खरीदारी लौटने से सोने में कुछ मजबूती आई और यह 1,54,800 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं चांदी भी शुरुआती नुकसान से उबरने की कोशिश करती नजर आई।
आखिर क्यों टूटा सोना-चांदी?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं:
- वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ना
- डॉलर इंडेक्स में मजबूती
- ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता
- महंगाई के नए आंकड़ों का इंतजार
- भू-राजनीतिक तनाव में नरमी की उम्मीद
इन वजहों से सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी पर दबाव बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का क्या है हाल?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं। निवेशकों की निगाह अमेरिका के महंगाई आंकड़ों और केंद्रीय बैंक की आगामी नीतियों पर टिकी हुई है। चांदी में भी हाल के दिनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विश्लेषकों का मानना है कि सोने के लिए 1.55 लाख रुपये के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण बना हुआ है। यदि कीमतें इस स्तर के ऊपर टिकती हैं तो तेजी लौट सकती है। दूसरी ओर यदि गिरावट जारी रहती है तो 1.52 लाख रुपये के आसपास मजबूत सपोर्ट देखने को मिल सकता है।
खरीदारी का सही समय है या नहीं?
जो लोग शादी-ब्याह या निवेश के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मौजूदा गिरावट अवसर साबित हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध खरीदारी की सलाह दे रहे हैं ताकि बाजार की अस्थिरता का जोखिम कम किया जा सके।

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