“ठेकेदार पूरी तरह निष्क्रिय, कल तक निरस्त होगा एग्रीमेंट”
47 लाख की जल जीवन मिशन टंकी में पहली बार पानी भरते ही झरने की तरह बहने लगा पानी
जिले के सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम जलगढ़ में जल जीवन मिशन योजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहा है। पानी टंकी लगभग 47.65 लाख रुपये की लागत से निर्मित हुई है जो कि रात में सरपंच प्रतिनिधि द्वारा पानी टंकी में पहली बार पानी भरते ही कई स्थानों से भारी रिसाव शुरू हो गया। टंकी से चारों तरफ झरने की तरह पानी बहता देख ग्रामीणों में नाराजगी है, और शासन प्रशासन के लिए गुस्सा है.

मामले को लेकर सरपंच संघ अध्यक्ष एवं ग्राम जलगढ़ के सरपंच प्रतिनिधि लिंगराज साहू ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021- 2022 से गांव में पाइपलाइन, पानी टंकी और घर-घर नल कनेक्शन का कार्य शुरू किया गया था, लेकिन यह कार्य 2024 में अधूरा कर बंद कर दिया गया, फिर 2025 में कार्य को चालू कर टंकी को पूरा किया लेकिन आज तक कई घरों में नल कनेक्शन नहीं पहुंच पाया है और ठेकेदार द्वारा कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में पानी की समस्या को देखते हुए लगभग 500 मीटर दूर स्थित बोरवेल से पहली बार पानी लाकर टंकी में भरा गया, लेकिन पानी भरते ही टंकी के चारों तरफ से रिसाव शुरू हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा लग रहा था मानो टंकी नहीं बल्कि कोई झरना बह रहा है।
कार्य स्थल पर लगे सूचना बोर्ड के अनुसार यह कार्य “जल जीवन मिशन” के अंतर्गत ग्राम जलगढ़ में जल प्रदाय योजना के रेट्रोफिटिंग कार्य के रूप में कराया गया। योजना की कुल लागत लगभग 47.65 लाख रुपये है। बोर्ड में ठेकेदार एजेंसी के रूप में “शिवम कंस्ट्रक्शन” मेसर्स भरत राठी का नाम दर्ज है, जबकि एजेंसी जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन महासमुंद को बताया गया है।
# SDO पीएचई विभाग – खिलेश कुमार साहू
मामला संज्ञान में आया है, ठेकेदार की निष्क्रियता और भुगतान को लेकर कल पत्राचार कर उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा.
उन्होंने बताय की ठेकेदार द्वारा आवेदन देकर गुहार लगाते हुए कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, जिसके बाद विभाग ने उसे दोबारा मौका दिया था, लेकिन संबंधित ठेकेदार का एग्रीमेंट कल तक निरस्त करा दिया जाएगा।
सवाल : 47 लाख की योजना में अब तक कितना भुगतान हुआ?
इस सवाल पर एसडीओ खिलेश साहू ने बताया कि योजना में लगभग 75 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि “जितना काम हुआ है, उतना ही भुगतान किया गया है।”
जब निर्माण कार्य में पहली ही टेस्टिंग में भारी रिसाव सामने आ गया, सीढ़ियां टूटने लगीं और कई जगह पाइपलाइन अधूरी है, तो क्या विभागीय इंजीनियर और अधिकारी नियमित निरीक्षण के लिए मौके पर नहीं गए थे?
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि इंजीनियरिंग निगरानी होने के बावजूद यदि गुणवत्ता की कमी नहीं पकड़ी गई, तो आखिर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
यदि निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और गुणवत्ता की कमी सामने आ रही है तो अधूरा कार्य कौन पूरा कराएगा?
गौरतलब है कि ग्राम जलगढ़ में 8 वार्ड हैं जिसमे से 2 वार्ड में सरपंच ने स्वम पाइप लाइन बिछाए है.
जीवन मिशन के तहत पानी टंकी, पाइपलाइन और घर-घर नल कनेक्शन का कार्य कराया गया था। लेकिन कई मोहल्लों में अब तक पाइपलाइन अधूरी है और कई घरों में नल-जल टोटी तक नहीं लग पाई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जिस टंकी में पहली ही टेस्टिंग में भारी रिसाव सामने आ गया, क्या वह भविष्य में टिक पाएगी या फिर उसे दोबारा बनाना पड़ेगा? साथ ही जिन मोहल्लों में पाइपलाइन और नल कनेक्शन अधूरे हैं, वहां कार्य पूरा कराने में कितना अतिरिक्त खर्च आएगा, यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है।
योजना में गुणवत्ता विहीन निर्माण और लगभग 75 प्रतिशत भुगतान होने की बात सामने आने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। अब ग्रामीण पूरे मामले की तकनीकी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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