इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) की सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाओं के दौरान भले ही नकल प्रकरणों में कमी आई है, लेकिन अब विद्यार्थी काफी हाईटेक हो गए हैं। वे परीक्षा में नकल करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद लेने लगे हैं। जहां चैट जीपीटी और जेमिनी से प्रश्न पूछकर विद्यार्थी उत्तरपुस्तिका में जवाब लिख रहे हैं।
यह गड़बड़ी तब सामने आई है जब डीएवीवी के उड़नदस्ते ने परीक्षा केंद्रों पर विद्यार्थियों की चेकिंग कीं। उस दौरान विद्यार्थियों के पास से मोबाइल जब्त किए गए हैं। दिसंबर से लेकर मार्च के बीच स्नातक-स्नातकोत्तर व व्यावसायिक सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाएं करवाई गईं।
लगभग 40 से ज्यादा परीक्षाओं में 70 हजार छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए हैं। इस अवधि में पचास नकल प्रकरण बने हैं, जिसमें सात छात्र अपने साथ परीक्षा कक्ष में मोबाइल रखे हुए थे। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्रों पर सख्ती होने के बावजूद विद्यार्थियों के पास से मोबाइल जब्त किए गए हैं।
इससे परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। उड़नदस्तों ने जांच में पाया कि इन छात्रों ने एआई एप्लीकेशन की मदद से प्रश्नों के उत्तर खोजे हैं। विश्वविद्यालय के मुताबिक अलग-अलग पाठ्यक्रम की परीक्षा में विद्यार्थियों के पास मोबाइल मिले हैं। इन विद्यार्थियों का नकल प्रकरण बनाकर जांच समिति को सौंपी गई है।
प्रवेश पत्र के पीछे लिखे जवाब
नकल प्रकरणों में सबसे ज्यादा उन विद्यार्थियों की संख्या है, जो अपने एडमिट कार्ड के पीछे जवाब लिखकर लाए थे। ये छात्र-छात्राएं परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्र पर हुई चेकिंग में पकड़े गए हैं। लगभग 18 से अधिक नकलची विद्यार्थियों के प्रकरण बने हैं।
किताबों के पन्ने भी जब्त
परीक्षाओं में अलग-अलग तरह से विद्यार्थी नकल करते पकड़े गए हैं। अधिकांश विद्यार्थियों के पास से नकल सामग्री जब्त की गई है, जिसमें किताबों और गाइड के पन्ने मिले हैं। जिन्हें नकलची विद्यार्थियों ने कपड़ों में छिपाए रखे थे जबकि कुछ विद्यार्थियों ने जूतों में चिट रखी हुई थी।
सालभर में बनते थे 600 प्रकरण
2022 से 2024 के बीच परीक्षाओं में नकल प्रकरणों की संख्या काफी अधिक रही है। सालभर में 600 से ज्यादा नकलची विद्यार्थियों पर प्रकरण दर्ज किए गए हैं। विश्वविद्यालय की समिति ने जांच की, जिसमें 60 फीसद विद्यार्थियों को एक-एक विषय में फेल किया गया है जबकि तीन प्रतिशत विद्यार्थियों के पास काफी नकल सामग्री मिली है।
इसके चलते उन्हें एक से दो विषयों की परीक्षा दोबारा देना पड़ी है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक 2025 में परीक्षा के दौरान नकल प्रकरण घटने लगे हैं, जो 250 से 300 के बीच रह गए हैं।

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