सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिए तैयारियां तेज, संतों के सुझावों को प्रशासन ने प्राथमिकता दी
उज्जैन, मध्य प्रदेश – आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा-निर्देशों में सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने साधु-संतों के साथ मिलकर विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। प्रशासन का यह कदम महापर्व को बेहतर तरीके से आयोजित करने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए उठाया गया है।
निर्माण कार्यों का निरीक्षण और संतों की संतुष्टि
निर्माण कार्यों का निरीक्षण त्रिवेणी नवग्रह शनि मंदिर से शुरू हुआ, जिसके बाद अधिकारियों और संतों ने नवीन घाट निर्माण कार्यों का जायजा लिया। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि:
- 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव कम होगा।
- शिप्रा नदी को शुद्ध करने के लिए चल रही परियोजनाओं का भी निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध जल प्राप्त हो।
- पुल निर्माण और आवागमन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि महापर्व के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सके।
संतों के सुझाव और प्रशासन की प्रतिबद्धता
निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ संत डॉ. रामेश्वर दास महाराज ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया और बताया कि:
- अब तक करीब 42 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जिससे समय पर सभी कार्यों की समाप्ति की उम्मीद है।
- संतों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए जैसे:
- विकलांगजन सुविधाएं सुनिश्चित करना।
- महिलाओं के लिए वस्त्र परिवर्तन कक्ष और स्वच्छ टॉयलेट व्यवस्था।
- घाटों की सीढ़ियों पर फिसलन को रोकने के लिए उपयुक्त कदम उठाना।
प्रशासन ने इन सभी सुझावों को नोट किया और आवश्यक सुधार करने का भरोसा दिया।
सिंहस्थ महापर्व 2028 की सफलता के लिए समन्वित प्रयास
इस साल सिंहस्थ महापर्व में किए जा रहे बदलाव और निर्माण कार्यों से यह सुनिश्चित होगा कि श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित, और यादगार अनुभव मिले। प्रशासन और संत समाज के बीच समन्वय से यह पर्व और भी भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।
- सभी कार्यों का समय पर पूरा होना सुनिश्चित किया जाएगा, और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए प्रत्येक पहलू पर ध्यान दिया जाएगा।
- 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण श्रद्धालुओं की भीड़ को उचित रूप से प्रबंधित करेगा और स्नान व्यवस्था को और भी सुगम बनाएगा।

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